बहर- 212221122111221122
तोर आँखी के कजरा मा, अटक गेहे मन मोरे ।
तोर झुल-झुल के रेंगना मा, भटक गेहे मन मोरे।।
मोला कतका तै अउ तरसाबे, अब इहाँ वो सुन रानी,
तोर हाँ के देखत रसता, झटक गेहे मन मोरे ।।
(रेंगना- रें मा अउ मोला -ला मा भार गिराये गेहे )
तोर आँखी के कजरा मा, अटक गेहे मन मोरे ।
तोर झुल-झुल के रेंगना मा, भटक गेहे मन मोरे।।
मोला कतका तै अउ तरसाबे, अब इहाँ वो सुन रानी,
तोर हाँ के देखत रसता, झटक गेहे मन मोरे ।।
(रेंगना- रें मा अउ मोला -ला मा भार गिराये गेहे )
बहर- 21212221212
तोर मीठ बोली, मोर जान हे।
तोर ये ठिठोली, मोर जान हे।।
तोर छोड़ के जाते बिरान हे,
आज एक होंली, मोर जान हे।।
तोर मीठ बोली, मोर जान हे।
तोर ये ठिठोली, मोर जान हे।।
तोर छोड़ के जाते बिरान हे,
आज एक होंली, मोर जान हे।।
जगदीश "हीरा" साहू (२७९१६)


