गुरुवार, 25 अगस्त 2016

पागा कलगी-16//4// लक्ष्मी गोपी मनहरे


अंतरा- जाना रे परेवना कहिदे संदेश
बछर भर होगे भाई गेहे परदेश

पर(1) अखियन ले आसु बोहाये सुरता म तोर
तरसत हे बइरी नैना भाई कर लेते मोरो सोर
हिरदय मोर रोवत रहिथे देखे बर भेष
जाना रे परेवना कहिदे संदेश
पद(2) राखी मया के डोरी हरय पबरीत धागा
जूग जुग ले भाई बहिनी अमर रहि नाता
हिरदय मोर रोवत रहिथे देखे बर भेष
जाना रे परेवना कहिदे संदेश
पद(3) आगे पावन राखी भाई हवय तोर अगोरा
घेरी बेरी झाकव दुवारी हवय तोर निहोरा
हिरदे मोर रोवत रहिथे देखे बर भेष
जाना रे परेवना कहिदे संदेश
रचना लक्ष्मी गोपी मनहरे
गांव पथरपूंजी बेरला
जिला बेमेतरा

//पागा कलगी- 15 के परिणाम //





संगी हो जय जोहार
पागा कलगी 15 के मंच संचालक भाई मिलन मलरिहा द्वारा देगे विषय ‘देश बर जीबो देश बर मरबो‘ मा 30 रचना आइस । ये प्रतियोगिता के निर्णायक
श्री तुकाराम कंसारी, संपादक राजिम टाइम्स
श्री देवेन्द्र परिहार, प्रख्यात राष्ट्रवादी, राष्ट्रीय कवि रहिन।
ये दरी परिणाम देवब मा थोकिन देरी होगे येखर बर क्षमा चाहत हंव । कारण ये रहिस के हमर दू निर्णायक म के एक झन के निर्णय कल आईस, दूनों निणायक के गहन अध्ययन अउ भाव शब्द के आंकलन ले जेन निर्णय देईन ओ अनुसार
ये प्रतियोगिता के विजेता हे-
पहिली-श्रीचोवा राम वर्मा " बादल"
हथबंद
9926195747
दूसर-श्री गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा ( महानदी )
थाना-आरंग ,जिला-रायपुर छ.ग.
9977213968
तीसर- श्री राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद ( समोदा )
9713872983
प्रशंसा के लइक- श्री दिलीप वर्मा
बलौदा बाज़ार
अउ मनमोहन सिंह ठाकुर
हनुमान चौक ,खरसिया .
सबो विजेता संगी मन ला करेजा के अंतस ले बधाई

शुक्रवार, 19 अगस्त 2016

पागा कलगी-16 //3//संतोष फरिकार

जा जा रे मोर पडकी परेवना
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जा जा रे मोर पड़की परेवना
तय मोर मंईके बर ऊड़ जा ना
मोर भैया बर राखी छोड़ आ ना
जा जा रे मोर पड़की परेवना
मोर दाई ददा के संदेसा ले आबे
काय काय बुता करत हे पुछ लेबे
मोर संगी सहेली के सोर ले लेबे
भैया भंऊजी संग मील के आबे
जा जा रे मोर पड़की परेवना
मोर संदेस पुछही त दाई ल बताबे
तोर बेटी बेटी ह बने बने हवय
दाई ददा के सुरता करत रहिथे
भैया भंऊजी के नाव लेवत रहिथे
जा जा रे मोर पड़की परेवना
मोर दाई ददा कन बंईठ के आबे
बने हाल चाल पुछ के ही आबे
मोर मंईके के खेत खार घुम आबे
भैया के संग दीन भर बिता लेबे
जा जा रे मोर पड़की परेवना
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रचनाकार
संतोष फरिकार
देवरी भाटापारा
# मयारू
९९२६११३९९५

पागा कलगी-16 //2//चोवा राम वर्मा" बादल "

उड़ जा रे परेवना,भईया बर राखी पहुंचाबे ।
काली हे राखी के तिहार, झन कोनो मेर बिलमाबे ।
नानपन म दाई-ददा सिरागे,
पालिन भउजी भईया ।
दुःख के घाम कभू नई पाएवं,
राखिन अंचरा छंईया ।
बड़ दिन होगे देखे नई अवं,झटकुन आहीं बलाबे ।
उड़ी जा रे परेवना,भईया बर राखी पहुंचाबे ।1
ददा के पाछू ददा बरोबर,
बड़का भईया ह होथे ।
छोटे भाई ह दीदी कहिके ,
घातेच्च मया ल पुरोथे ।
बड़ पबरित ए पिरित के धागा,झन कहूँ तैँ गिराबे ।
उड़ी जा रे परेवना , भईया बर राखी पहुंचाबे ।2।
मोर धनी परदेस गेहे ,
कब आही नइये संदेसा ।
सास-ससुर के सेवा में हौं ,
हाबय मोरे भरोसा ।
मै जातेवं फेर का करवं,फोर फोर के बने समझाबे ।
उडी जा रे परेवना , भईया बर राखी पहुंचाबे ।3 ।
सुभ मुहुरुत म भईया पहिनहि,
बहिनी के भेजे राखी ।
पन करही मोर रक्छा करे के,
सुरुज देंवता ल देके साखी ।
कतका फभही भईया ल राखी,आके मोला बताबे ।
उड़ी जा रे परेवना,भईया बर राखी पहुंचाबे। ।4।
आबे तहाँ ले तोला रे भाई,
जेन खाबे मैं खवाहूँ ।
तोर थकासी फुर्र हो जाही,
नंहँवा , डेना सहलाहूँ ।
पाछू बछर कस तीजा पोरा म, मोर संग मइके जाबे ।
उड़ी जा रे परेवना , भईया बर राखी पहुंचाबे ।
काली हे राखी के तिहार, झन कोनो मेर बिलमाबे ।5।
(रचनाकार --चोवा राम वर्मा" बादल ")
हथबंद
दिनांक----17 अगस्त 2016

पागा कलगी-16//1//बंटी छतिसगढिया

ऐ रे परेवना जा
मोर भैया के देश रे
भैया हाबे आन देश
बहिनी मै आन रे
ले जा ले जा रे परेवना
मोर भैया बर संदेश रे
रदॣदा जोहत हाबे बताबे
बहिनी ससुरे देश मे
राखी के तिहार म भाई
ले वा के ले जा अपन देश रे
ऐ रै परेवना जा
मोर भैया के देश रे ।।।।
दाई ददा तिही रे भाई
तोर आश म आहू ग
तोर छोरे लहू के मै
तोला कईसे भूलाहू ग
मोर भरोसा तिही भैया
राखी के फरज निभाबे
हाबे अगोरा ऐ ग भैया
मोला अपन देश
ले वा के ले जाबे
ऐ रे परेवना जा
मोर भैया के देश रे
भैया ल कहि दे बे संदेश ।।।
तोर बहिनी बेटी हो भाई
तिही मोर महतारी ग
तोर कोरा म खेले बाढे
तिही पराये भावर
मोर घर दुवारी बसाये भाई
मोला ले वा के जा भाई
तोर अगोरा हाबे मोला
तिही मोर ददा दाई
ऐ रे परेवना जा
मोर भैया के देश
भैया ल दे देबे संदेश ।।।।
++++++++++++++++++++++
गलती होही क्षमा करहू ग
मै नवसिखिया नादान
क्षमा करे जे भगवान बरोबर
क्षमा करे ते महान ।।।।

//पागा कलगी 16 के रूपरेखा//

//पागा कलगी 16 के रूपरेखा//

अवधि-16 अगस्त16 से 31 अगस्त तक

विषय- दे गे चित्र के अनुसार
संचालक- श्री आचार्य तोषण चुरेन्द (पागा कलगी-7 के विजेता)

निर्णायक-श्री दीनदयाल साहू, सहायक संपादक चौपाल, हरिभूमि
श्री राजकमल राजपूत वरिष्ठ साहित्यकार, थानखम्हरिया बेमेतरा

नियम-छत्तीसगढ़ी कविता के प्रतियोगिता पागा कलगी 15 के रचना सीधा छत्तीसगढ़ी मंच मा पोष्ट करना हे । जेन रचनाकार छत्तीसगढ़ी मंच के सदस्य नई हे, ओ एडमिन मन के व्यक्तिगत वाटशॅंप म भेज सकत हंे । कानो सार्वजनिक वाटशाॅप/फेसबुक समूह से रचना नई देना हे । प्रतियोगिता अवधि तक प्रतियोगिता के रचना केवल फेसबुक समूह छत्तीसगढ़ी मंच अउ ब्लाग पागा कलगी भर म होही । यदि रचना अंते तंते पाये जाही त रचना ला प्रतियोगिता से बाहिर कर दे जाही ।

विधा - अइसे विधा के बंधन नई हे, फेर काव्य के कोनो विधा मा रचना दैं त विधा के संक्षिप्त जानकारी रचना के पहिली दू डांड म देवंय त जादा अच्छा रहिही । जेखर ले नवा रचनाकार मन ओ विधा ला आत्मसात कर सकय । विधा के ज्ञान नई होय त विधा के नाम मत देवंय ।
विशेष- रचना हर स्थिति म चित्र ला शब्द देवत होय, विषय ले भटके रचना ला अमान्य कर दे जाही ।
प्रतिभागी रचना छत्तीसगढ़ी मंच ला छोड़ के अंते पोष्ट नई करना हे ।

पागा कलगी-15 //29//आशा देशमुख

| देश बर जीबो देश बर मरबो |
बैरी बैरी सब कथे ,असली बैरी कौन |
घर मा बइठे भेदिया ,देश ल बेचय जौंन ||
ये माटी चंदन अय भइया ,माथ म अपन लगावव |
पहली तो घर के बैरी ला ,कसके धूर चटावव |
जेन करय दाई के सौदा ,वो सपूत का होही |
मुड़ी मुड़ाके गली घुमावव ,तर बत्तर वो रोही |
ज्ञान रतन भंडार भरे हे ,ये भारत भुंइया मा |
रहना चाहे सब दुनियाँ हा , येकर गा छइहाँ मा |
आगी बर आगी बन जावव ,पानी बर गा पानी |
झन करन देवव अब बैरी ल ,अपन इहाँ मनमानी |
भारत भुइयाँ के सब लइका , सब मिल मान बढ़ावव |
एकर रक्षा के खातिर सब,सरबस अपन लुटावव |
ये धरती मा जनमे हावे ,सरग के जम्मो देवता |
जइसे लागे पाये हावे,झारा झारा नेवता |
जतका इहाँ जयचंद लुकाए,खोज खोज के मारव
इकर बंधना ले धरती ला ,सब मिल के मुक्तावव |
ये दाई झन कर तै चिंता ,तोरे सेवा करबो |
तोरे अंचरा मा हम जीबो ,तोर पँउरी म मरबो |
, जय हिन्द जय भारत,
आशा देशमुख
एनटीपीसी जमनीपाली कोरबा
छत्तीसगढ़