बुधवार, 11 मई 2016

पागा कलगी 9//रामेश्वर शांडिल्य

नवा बहुरिया
दाई ददा के कोरा म इतरात रहे ओ ऩ
खेले कूदे के उमर म ससुरार आगे ओ ऩ
छुटगे संग भाई बहिनी के.
दाई ददा के कोरा ऩ
छुटगे संग सखी सहेली के.
घर अंगना गाव के खोरा ऩ
ससुरार म मुड ढाके लजात रहे ओ ऩ
खेले कूदे के उमर म ससुरार आगे ओ ऩ
मइके म फूल कस महमहावत रहे.
पारा पारा म तितली कस मडरावत रहे ऩ
ससुरार म आके समझदार होगे ओ ऩ
खेले कूदे के उमर म ससुरार आगे ओ ऩ
सास ननद करा मइके के.
गोठ गोठियात रहे.
अपन गांव के कुकूर ल.
सहरात रहे.
तेार गोठ ल सुन ननद खिसियात रहे ओ ऩ
दाई ददा के कोरा म इतरात रहे ओ ऩ
रामेश्वर शांडिल्य
हरदीबाजार कोरबा

पागा कलगी 9//सुखदेव सिंह अहिलेश्वर

--: परचे देवत रूख :--
...गीत....
मोर नाव हे बीरवा रुखवा ..
गांव के उत्ती म मोर ठिकाना हे।
मोर संग पिरित के गठरी ल जोरके,
जिनगी के बछर बिताना हे,जिनगी के बछर बिताना हे।
मोर नांव हे बीरवा रूखवा ,
गांव के उत्ती म मोर ठिकाना हे।
'१' उवत सूरुज संग भोजन बनाथव,
जीव जन्तु ल खवाथव...।
कुहरा धुआं ल पियत रहिथव,
सुघर हवा बगराथव...।
हरियर-हरियर गीत मै गाथव...
हरियर-हरियर गीत मै गाथव,
मोर संग सबो ल गाना हे,मोर संग सबो ल गाना हे।
मोर नांव हे .........
'२' मोर सुघ्घर फूल मोर गुरतुर फल,
लकड़ी घलो ल बउरत हव...।
कागज कपड़ा अवषधि तरकारी,
चटनी घलो ल संउरत हव...।
पर उपकार के मोर करतब ल..
पर उपकार के मोर करतब ल,
जम्मो झन ल बताना हे,जम्मो झन ल बताना हे।
मोर नांव हे........
'३' भुमि ल बांध अपरदन रोकव,
पानी घलो बलाथव...।
जल थल अउ वायु परदुषन ल,
दूर भगाथव...।
माटि म मिलके संगवारी...
माटि म मिलके संगवारी,
तुंहरेच काम मे आना हे,तुंहरेच काम मे आना हे।
मोर नांव हे बीरवा रूखवा,
गांव के उत्ती म मोर ठिकाना हे...।
रचना:--सुखदेव सिंह अहिलेश्वर
गोरखपुर,कवर्धा
९६८५२१६६०२

शनिवार, 7 मई 2016

पागा कलगी 9//राजेश कुमार निषाद

मोर जनम देवईया दाई
तोला खोजंव कति कति।
तै हावस ओ एति ओति
मैं तोला खोजंव कति कति।
नौ महीना ले अपन कोख म
रखे ओ मोला जतन के।
पांच बरस के होवत ले
दूध पिलाये अपन तन के।
कोख ले अपन जनम दे हस मोला
लाख लाख पीड़ा ल सहिके।
किसम किसम के मोला भोजन कराये हस
अपन लांघन भूखन रहिके।
कतेक तै दुख सहे ओ मोर सति
मोर जनम देवईया दाई
तोला खोजंव कति कति।
नान्हे पन ले मैं तोर दुलरवा रेहेंव
नई जानेंव तोर दुलार ओ।
कतेक मैं रोवंव चिल्लावंव
पर देवस तै भुलार ओ।
तोर मया के कतेक करंव बखान
पांव पखारंव तोर कोटि कोटि
मोर जनम देवईया दाई
तोला खोजंव कति कति।
अंगरी धर के चले बर मोला
दाई तहीं हर सिखाये हस।
मैं तोर लईका दुलरवा दाई
गली खोर म घुमाये हस।
महिमा तोर निराली दाई
तोर गुण ल गावंव सबो कोति
मोर जनम देवईया दाई
तोला खोजंव कति कति।

रचनाकार÷ राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद (समोदा )

शुक्रवार, 6 मई 2016

पागा कलगी 9//दिनेश देवांगन "दिव्य"

रोवत हे परियावरण, रोथँय नदी पहाड़ !
मनखें तज इंसानियत, करत हवय खिलवाड़!!
करत हवय खिलवाड़, काँटथें जंगल झाड़ी!
धुआँ करिस आकास, कारखाना अउ गाड़ी !!
सुनव दिव्य के गोंठ, मनखें जहर बोवत हे!
लेवन कइसे साँस, परानी सब रोवत हे !!


काॅटव रुख राई नहीं, हो जाही जंजाल !
शुद्ध हवा पाहव कहाँ, होही जी के काल !!
होही जी के काल, बरसही बादर कइसे !
उजर जही संसार,बिना जल मछरी जइसे !!
देत दिव्य संदेस, भलाई सबके छाॅटव !
सबो रही खुसहाल, नही रुख राई काॅटव !!

पेड़ लगावँव रोज गा, पेड़ हमर हे जान !
हाँसी जब परियावरण, संग हमूँ मुसकान !!
संग हमूँ मुसकान, नाचही चारों मउसम!
सावन अउ आषाढ़, बरसही पानी झमझम!!
सुनव दिव्य के गोंठ, प्रकृति ले मया बढावँव!
इही हमर वरदान, जतन के पेड़ लगावँव!

दिनेश देवांगन "दिव्य"
सारंगढ़ जिला - रायगढ़ (छत्तीसगढ़)

मंगलवार, 3 मई 2016

पागा कलगी 9 //आचार्य तोषण

॥छत्तीसगढ़ के तिहार॥
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बड़ नीक लागे संगी मोला
छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
झुमै नाचै सब नर नारी
मया के होवै बउछार गा।
हरेली मनाबो सावन मा
नांगर चढाबो रोटी चीला।
हरिहर दिखै धनहा भुंइया
झुमरय माई अउ पीला।।
बरखा रानी झिमिर झिमिर
पानी देवय फुहार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला
छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
बांधय राखी बहिनी हर
अपन भाई के कलाई मा।
भाई देवय बचन बहिनी ल
जान देहूं तोर भलाई मा।।
भाई बहिनी के मया देखे
उतारे नजर संसार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला
छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
आगे भादो जांता पोरा
समारू नंदिया दउडाय।
दाई बहिनी के तीज तिहार
गौरा शंखर ल मनाय।।
आनी बानी के रोटी पीठा
रांधे करे फरहार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला
छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
आगे नवरात कुंआर मा
चल ना जोत जलाबो।
दशेरा संग कातिक मा
घर-घर दीया जलाबो।
खाबो नवा जुरमिल संगी
पाबो मया दुलार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला
छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
पूस पुन्नी के बेरा सुघ्घर
छेरछेराय घर-घर जाबो।
बइठाबो टुकना म मिट्ठू
मिल गीत सुआ के गाबो।।
घर कुरिया सबके खुले
अन्नकुंवर के भंडार गा।
बड़ नीक लागे संगी मोला
छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
फागून मस्त महीना संगी
उड़ावय रंग गुलाल जी।
लइका सियान जवान मितवा
दिखय सबे लाले लाल जी।।
भर पिचकारी मारत हावय
एक दुसर ला बउछार गा ।
बड़ नीक लागे संगी मोला
छत्तीसगढ़ के तिहार गा ।
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////जय छत्तीसगढ़////
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रचना:-आचार्य तोषण
गांव-धनगांव डौंडीलोहारा
जिला-बालोद, छत्तीसगढ़
पिन-४९१७७१
९६१७५८९६६७

सोमवार, 2 मई 2016

पागा कलगी 9 बर//सतोष फरिकार

मोला काही नई आय
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दाई कहे बेटी ला
चाऊर निमार दे बेटी
बेटी कहत हे दाई ला
नई आय मोला निमारे ला
बेटी के फेशन देख
दाई हर लजावत हे
काम बुता काही नई करय
दिन भर चेहरा सजावत हे
दाई बर गुर्रावत हे
अईसन दिन धलो आगे
बेटी कहत हे दाई ला
छेरकीन टुरी हर दाई
जिन्श अऊ टाप पहिन
छेरी चराय बर जावत हे
ओखर ले का कम हव दाई
मय तो करत हव पढ़ाई
पढ़े बर जात हे बेटी
आनी बानी किरीम लगात हे
मसमोटी देख बेटी के
दाई चिन्ता म दुबरावय हे
अईसन दिन धलो आगे
स्कुल ले आके टीवी ल देखत
अपन फेशन ल बढ़ावत हे
दिन रात दाई सोचत
स्कुल म जाके न जाने
बेटी का पढ़ाई करत हे
ददा हर दिन रात
कमाई भर करत हे
बेटी काय करत हवय
सुध घलो नई लेवत हे
अईसन दिन घलो आगे
कुछू काम सीखे ल कहिबे
मोला नई आय कहिके चिल्लावत हे
""""""""""""""""""""'""""'''
सतोष फरिकार
देवरी भाटापारा
जिला बलौदा बजार भाटापारा
‪#‎मयारू‬
9926113995

छत्तीसगढ़ी मंच के चर्चा गोष्ठी

 1 मई 2016 के बेमेतरा जिला के थानखम्हरिया मा स्थानीय निराला साहित्य समिति के सहयोग ले एक चर्चा सह काव्य गोष्ठी के आयोजन करे गिस । आयोजन के मुख्य अतिथि रहिन हिन्दी साहित्य समिति दुर्ग के अध्यक्ष डां संजय दानी, विशिष्ठ अतिथि गुरतुर गोठ के संपादक श्री संजीव तिवारी, निराला साहित्य समिति थान खम्हरिया के अध्यक्ष श्री राजकमल राजपूत ।  कार्यक्रम के अध्यक्षता करिन स्थानीय विप्र समाज के प्रमुख श्री राजेन्द्र प्रसाद तिवारी । कार्यक्रम के भाई अनिल तिवारी के संचालन मा सबले पहिली मा षारद के पूजा अर्चन दीप प्रज्वलन के पश्चात अतिथि अउ कार्यक्रम मा पधारे सबो साहित्यकार भाई मन तिलक लगा के अउ श्रीफल भेट करके स्वागत करे गीस ।

स्वागत परम्परा के बाद उद्बोधन के पहिली कड़ी मा श्री योगेश्‍ा तिवारी जी अपन बात रखत कहिन के केवल हमर षब्द ला छत्तीसगढ़ी नई होना चाही बल्कि हमर व्यवहार ला घला छत्तीसगढि़या होना चाही । हमर साहित्य मा छत्तीसगढ़ के लोक संस्कृति-लोकव्यवहार ला श्‍ाामिल होना चाही ।

छत्तीसगढ़ी मंच के संयोजक मंच ले परिचय करात बताइन के अइसे तो छत्तीसगढ़ी मंच विगत 2 बछर ले अस्तित्व मा रहिस फेर ये बछर के देवारी के संग ‘छत्तीसगढ के पागा‘ नाम ले छत्तीसगढ़ी कविता के प्रतियोगिता षुरू करे गीस  । जेन मा नव रचनाकार मन संग दिन अउ आज ‘छत्तीसगढ़ के पागा‘ के 7 सफल आयोजन के बाद ‘छत्तीसगढ़ के पागा कलगी के 8 सफल आयोजन के 9वां आयोजन आज ले श्‍ाुरू  होगे हे ।  वास्तव मा ये आयोजन के पाछू ये मंश्‍ाा रहिस जइसे बहुत अकन हिन्दी साहित्यिक समूह हा कई इन मा प्रतियोगता करवत हे, ओइसन छत्तीसगढ़ी मा नई रहिस ये कमी ला पूरा करे के नानकुन प्रयास चलत हे ।  छत्तीसगढ़ी मंच हा लगातार प्रयास करत हे के हमर छत्तीसगढि़या रचनाकार मन अपन रचना ला कोनो विधा मा बांधय ।  कविता के छिदिर-बिदिर बरे विधा तुकांत, गजल, हाइकू, छंद, ददरिया, कर्मा लोकगीत आदि के विधान ला जानय अउ विधान मा रचना करंय ।  ये प्रयास ले उम्मीद जागे हे नवा रचनाकार मन ये विधा ले परिचित होंही ये विधा मन मा लिखही ।

 अंतरजाल के छत्तीसगढि़या सिरमौर गुरतुर गोठ के संपादक श्री संजीव तिवारी अपन बात रखत इंटरनेट के महत्ता ला बतवत कहिन- हमर सियान वरिष्ठ साहित्यकार मन के जमाना अउ आज के जमाना बहुत अंतर आगे हे । पहिली रचनाकार के रचना कोनो पेपर मा छप जतीस ता लोगन मन जानतीन के ओखर पुस्तक छप जतीस ता लोगन मन जानतीन । कहू पुस्तके छप जय ता कतका पुस्तक छपही 1000, 2000, के 5000 ये पुस्तक ला कतका झन पढि़न ता 5000 के 10000 फेर आज के रचनाकार के रचना जब इंटरनेट मा पोष्ट करे जावत हे ता कतका झन पढ़त होही अंदाजा लगावव एके दिन मा अतका कन हो सकत हे । दूसर बात ये रचना मन ला कोनो भी, कोनो दिन, कतको जुहर, कहू ले पढ़ सकत हे । अब पुस्तक पढ़ईयां मन रोज के रोज कम होवत हें । जुन्ना साहित्यकार मन के बात रखत कहिन के हमर सियान मन कहिथे के नवा लइका मन छत्तीसगढ़ी मा केवल छत्तीसगढ़ी के वंदना, भाखा के गान जइसे कुछ एक विष्‍ाय मा सिमट गे हें ।  कोनो रचनात्मक काम नई होत हे । सियान मन के पिरा मा अपन पिरा जोरत आदरणीय संजीव भैया कहिन के हमर आज के साहित्यकार नवरचनाकार के सबले बड़े कमी ये हे के हम न आज के न पाछू काल के रचनाकार मन हम नई पढ़न केवल अपने ला देखत रहिथन येही पाय के हमर विचार हा प्रगतिवादी नई लगत हे ।  नवरचनाकार अख्खड़ गांव ले आथें जिहां प्रकृति के बिम्ब भरे पडे हे तभो ले नवारचनाकार मन अपन बात ला सोज-सोज कहत जात हे कोनो बिम्ब के कोनो प्रतिक के सहारा नई लेवत हे ।  सोज-सोज तो कोनो मनखे अपन बोल चाल मा अपन भाव ला बगरावत रहिथे फेर हमर कवि होय ले का फायदा । अपन रचना मा बिम्ब के प्रयोग करे बर हमला छत्तीसगढ़ी साहित्य के संगे-संग हिन्दी साहित्य ला घला खूब पढ़ना चाही, गुनना चाही फेर अपन रचना गढ़ना चाही ।
 कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आदरणीय डां संजय दानी, संजीवजी के बात के समर्थन करत कहिन के परम्परागत विष्‍ाय के अलावा हमला नवा विष्‍ाय मा कलम चलाना चाही । जेन विष्‍ाय मा हम आज लिखत हन ओ दूसर के विष्‍ाय हे जेमा ओखर पहिचान हे ।  हमला अपन पहिचान बनाये बर अपन विष्‍ाय देना होही ।  अपन बात ला प्रतिक मा बिम्ब मा व्यक्त करना चाही ।
 अंत अध्यक्षी बात कहत श्री राजेन्द्र प्रसाद तिवारीजी छत्तीसगढ़ी मा बाढ़त अश्लीलता के चिंता व्यक्त करत अनुरोध करिन के ये बिमारी ला केवल नव रचनाकार मन रोक सकत हे ।  आप मन आघू आव अउ येखर इलाज करव ।

 चर्चा गोष्ठी के बाद ‘छत्तीसगढ़ के पागा‘ अउ ‘छत्तीसगढ़ के पागा कलगी‘ के विजेता संगी मन ला प्रषस्ति पत्र अउ जम्मो प्रतियोगिता के विजेता रचना मन के संग्रह ‘अउवल‘ ले सम्मानित करे गीस ।

 येखर बाद काव्य गोष्ठी प्रारंभ होइस जेमा दूरिहा-दूरिहा ले आय संगी मन अपन कविता के पाठ करिन । भाई राजेष निशाद, भाई संतोष्‍ा फारिकर, भाई ज्ञानु, भाई हेमलाल साहू, भाई मिलन मलरिहा, भाई दिनेष देवांगन दिव्य, भैया सूर्यकांत गुप्ता, भैया नवीन तिवारी, डां अषोक आकाष बालोद, बेमेतरा, रायपुर ले पधारे संगी मन के संगे-संग स्थानीय राजकमल राजपूत, अनिल तिवारी चैतन्य जितेन्द्र, सुनिल शर्मा के काव्य पाठ के बाद दूनो अतिथि श्री संजीव तिवारी अउ डां संजय दानीजी के काव्य पाठ होइस । काव्य गोष्ठी के संचालन रमेश चौहान द्वारा करे गीस ।  भाई सुनिल शर्मा  के आभार के साथ कार्यक्रम संपन्न होइस ।

 कार्यक्रम मा प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सहयोग बर सबो संगी मन ला छत्तीसगढ़ी मंच धन्यवाद सहित आभार कहत हे ।  कार्यक्रम के अतिथि डां संजय दानी, श्री संजीव तिवारी के मया अइसने मिलत रहय के कामना करत  हे ।  हम आभारी हंवन भैया अरूण निगम के जेन पारिवारिक दायित्व के कारण तन ले ना सही मन ले हमर संग जुड़े रहिन ।  छत्तीसगढ़ी मंच आभारी हे स्थनीय निराला साहित्य समिति थान खम्हरिया के जेखर सहयोग ले ये कार्यक्रम संपन्न होइस ।