शुक्रवार, 27 मई 2016

पागा कलगी-10//सुनील साहू"निर्मोही"

"तहुँ कुछु सीख़ ले भईया"
लईका मन के सबै मितान रथे,
अउ उज्जर ऊंखर ईमान रथे,
हाथ दया के देख नान्हे नान्हे।
तभे कहे लईका रूप भगवान रथे,
देख के सेवा मोर नोनी के ग....
अचरज म परे हे सबै देखईया।
तव तहुँ कुछु सीख़ ले भईया।।-2
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धन दौलत के करथन हम गुमान,
अउ बन जाथन हम बड़े सियान,
बड़ भारी परवचन सुनाथन??
अउ रहिथन दिनभर हम हलकान।
फेर दया धरम के काम करबो.....
देखे हन हम कतका कहईया।
तव तहुँ कुछु सीख़ ले भईया।।-2
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मनखे मनखे अपन म भुलाथे,
नोनी हमर धियान करा....थे,
बड़ सुघ्घर लगथे सेवा कर के।
आज लईका मन हमला सीखाथे,
कर दया तहुँ.....ले पीरा उधार....
फेर बिपत म बनहि तोर खेवईँया।
तव तहुँ कुछु सीख़ ले भईया।।
तव तहुँ कुछु सीख़ ले भईया।।।
सुनील साहू"निर्मोही"
ग्राम-सेलर
जिला-बिलासपुर
मो.8085470039

पागा कलगी-10//-हेमलाल साहू

@बेटी@
दया मया बेटी के हावे, अपना माने सबला जान।
देख बबा ला भूखा नोनी, करत हवय वो अन के दान।।
देख दया अतका नोनी के ,अंतस ले करथे परनाम।
श्रद्धा से आसूँ छलकत हे, तैय करे बड़ सुघ्घर काम।।
बेटा मोरो हावे नोनी, नइ आवय वो कुछ औ काम।
जांगर रहिते पूछिस मोला, अब करथे ओहा बदनाम।।
जिनगी भर राखेव ग पूँजी, पाई पाई मेहा जोर।
आज नई हे मोर ठिकाना, किंजरत हों मैं खोरे खोर।।
बोलिस नोनी मोर बबा गा, कउनो बेटा होय कपूत।
चल रहिबे मोरे घर मा तैं, अपन बनाहूँ तोला पूत।।
नोनी कहिस बबा झन होबे, तैहा मोर से कभु नराज।
बड़ भागी वो मानुष होथे, जेला मिलथे सेवा काज।।
बेटी बेटा सबो एक हे, कभू करव झन एमा भेद।
नर नारी से बसथे दुनियाँ, बेटी बर तब कइसे खेद।।
मान हेम के कहना संगी, सब करिहौ बेटी सम्मान।
सबके बेटी एक बरोबर, झन करहूँ एकर अपमान।।
-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़ जिला बेमेतरा
मो. नं.-9977831273

पागा कलगी-10//रामेश्वर शांडिल्य

बबा नातीन
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फूटपाथ म बैइठे बबा. 
भूखा बीमार लागथे ऩ
ओकर भूख भगाये ल.
नातिन भात सांग लानथे ऩ
"""""""""""""":""""""""""""""
सड़क म जीने वाला मन के.
ये हर कहानी हावे ऩ
अभाव गरीबी जीवन के.
भूख पियास निशानी हावे ऩ
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फोटू म तो बबा कुली के.
भेष म दिखथे ऩ
घाम म भुखाये थके.
अपन जिनगानी लिखथे ऩ
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पतरी म लाये भात सांग ल देख हाथ जोड लीस ऩ
नोनी के दया मया ल जान.
तरी ती मुंह मोड लीस ऩ
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नोनी जात दया मया के.
खजाना होथे ऩ
सुख दुख सब म. खुशी
के बीज बोथे ऩ
"""""""""""""""""""""""""""
दीया नई बरस बिना बातीन के ये फोटू आये बबा नातीन के ऩ
रामेश्वर शांडिल्य
हरदीबाजार कोरबा

बुधवार, 25 मई 2016

पागा कलगी-10//राजेश कुमार निषाद

।। पापी पेट के सवाल हे ।।
दर दर मैं भटकत हंव बेटी
देख मोर कईसन हाल हे।
मोर बर तै अतेक सुघ्घर भोजन लाने
खाहूँ मोर पापी पेट के सवाल हे।
लोग लईका ल पाल पोश के बड़े करेंव
फेर कोनो काम के नइये।
घर ले मोला बाहिर कर दिस
तभो ओमन ल चैन अराम नइये।
देवी बनके तै मोर करा आये
बेटी तोला मोर कतेक ख्याल हे।
तोर लाने भोजन ल मैं खाहूँ
मोर पापी पेट के सवाल हे।
सुघ्घर मानवता तै देखावत हस बेटी
फेर ये तो मोह माया के संसार हे।
आज तो तै मोला भोजन करावत हस
फेर मैं कहाँ जाहूँ न अब मोर घर द्वार हे।
सड़क किनारे मोर बसेरा बेटी
तन ढके बर न मोर करा चादर अऊ साल हे।
तोर लाने भोजन ल मैं खाहूँ बेटी
मोर पापी पेट के सवाल हे।
धन धन हे ओ दाई ददा
जऊन तोर जईसे बेटी ल जनम दे हे।
मोर जईसे गरीब अभागा करा
जऊन तोला भोजन धर के भेजे हे।
अईसन दाई ददा के मैं चरण पखारत हंव
जेकर तोर जईसन लाल हे।
तोर मया म मैं भोजन खाहूँ
मोर पापी पेट के सवाल हे।
रचनाकार÷ राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद ( समोदा )

पागा कलगी-10//सूर्यकांत गुप्ता

मगर नही अंधेर
सबे करमफल भोगथन, धरतिच मा जी जान।
कइसे कइसे जियत हन, धरके रोग सियान।।
जउन कोढ़ के रोग से, दुख पावत हे रोज।
सगा सहोदर हा घलो, करै न सेवा सोझ।।
घर बाहिर वो घूमथे, माँगत भरथे पेट।
किल्हर किल्हर के रेंगथे, कहुँचो जाथे लेट।।
प्रभु के घर मा देर हे, मगर नही अंधेर।
आथे कउनो भेस मा, सम्मुख देर सबेर।।
बेटा बर तरसत रथें, मारैं बेटी कोंख।
आँसू तो तकलीफ के, नोनी लेथे सोख।।
पा के नोनी आज मैं, भोजन तोर प्रसाद।
कइहौं बेटिच हा करै, सबके घर आबाद।।
जय जोहार....
सूर्यकांत गुप्ता
सिंधिया नगर दुर्ग

पागा कलगी-10 //ज्ञानु मानिकपुरी"दास"

$मानवता के सन्देश$
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धन्य-धन्य हे बेटी तोर मया,
दीन-दुःखी बर तोर दया।
अथाह परेम उमड़े दीन-दुःखी बर
दया मया छलकत हे तोर जिया।
मोर फ़ुटहा करम म अंजोर होंगे न,
गांव-गांव म बेटी तोर शोर होंगे न।
मोला पेट भर खवाके तय बेटी,
तय मोर दाई लइका मय तोर होगेव न।
देवत हे आज मानवता के सन्देश,
रहव चाहे कोनो देश-परदेश।
"जन सेवा ही प्रभु सेवा है"
मन में रहय झन झूठ,कपट,द्वैष।
वाह रे किस्मत अउ तोर खेल,
बेटा,बाप ल निकाले घरले ढकेल।
आज बेटा बर दाई-ददा गरु होंगे,
सिखौना बात उखर करु होंगे।
कहा गय समाजसेवी दान करइया मन,
बड़े बड़े बात करइया नेता भंडारा करइया मन।
"परहित सरिस धरम नही भाई" उपदेश करइया मन।
मुँह के बड़ लबार होथे करम धरम करइया मन।
दुनिया आथे दुनिया जाथे देखत खड़े तमाशा ल।
दया मया बिन जिनगी बिरथा हे कब समझहूँ ये परिभाषा ल।
बेटी,कखरो बेटी,कखरो पतनी,कखरो महतारी बन जथे।
दुःख सुख के समझइया दुलौरिन संग संगवारी बन जथे।
आओ मिलके ये संकल्प करन,
दीन दुःखी मनखे के करबो जतन।
मानव जीवन के सार इही हे"ज्ञानु"
भूखे प्यासे ल दाना पानी अउ बेटी के जतन।..... अउ बेटी के जतन।
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आपके छोटे भाई
ज्ञानु मानिकपुरी"दास"
चंदेनी(कवर्धा)

पागा कलगी-10//अशोक साहू, भानसोज


मनखे जनम ल पाके संगी
मनखे के सेवा बजा ले।
नर सेवा नारायण सेवा कईथे
ईही करम अपना ले।।
पियासे ल पानी पिया दे
लांघन ल खवा दे भात।
गरीब ह घला तो मनखे ए
झन मार ओला लात।।
पईसा होय ले कोनो अमीर नई होवय
दिल ले होवय धनवान।
गिरे थके के दुख ल हरथे
उही ओकर बर भगवान।।
दुवारी म आथे कोनो गरीब
लांघन भूखन पियासा।
झन करबे निराशा ओला
तोरे ले लगाए हे आशा।।
संसकार अइसन घर घर म होय
सिखय सुघ्घर सेवा भाव।
अमीर गरीब के गड्ढा पाटय
दीन हीन बर राहय लगाव।।

अशोक साहू, भानसोज