रविवार, 29 मई 2016

पागा कलगी-10 //-आशा देशमुख

दोहा ...
सरग नरक इंहचे हवे ,ये मनखे तैँ मान ,
जो जइसे करनी करे ,वइसे ही फल जान |
चौपाई
बइठे हावय भीख मंगैया |हाँका पारय सुन गा भइया |
मैं आवव गा अब्बड़ दुखिया | सुन गा दाऊ ये गा मुखिया |
भूख पियास म तरफत हावय | गीत भजन मा मन बहलावय |
दाई माई रानी दानी | देवव मोला दाना पानी |
वोला सुनके नोनी आइस |थारी भर के जेवन लाइस |
सुघ्घर गोठ मया के बानी |जइसे पागय आमा चानी |
अमरित कस जेवन हा लागिस | वो दुखिया के जीव जुड़ाइस |
ये नोनी तय हीरा बेटी | धरम करम हे तुहरे पेटी |
बेटी तै अस धरमी चोला | गड़य कभू झन काँटा तोला |
जेहर हावय दुख चिन्हैया |ओकर गोठ सुने कन्हैया |

दोहा ..
.देखय नोनी के मया ,दुखिया दिए असीस ,
ये बेटी जुग जुग जिओ , बन के राज रहीस |
-आशा देशमुख

पागा कलगी-10//चैतन्य जितेन्द्र तिवारी

.." जय हो तोर बेटी".........
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जय हो तोर बेटी धन्य हे तोर दाई ददा
पाए हे तोर कस लइका खुश रहिबे सदा ।1।
जब आथे सियानी लइकन छोड़ देथे साथ
जब आथे उंखर पारी खीच लेथे अपन हाँथ ।2।
सुग्घर राखय नइ बहु बेटा रंग रंग के सुनाथे
कहि देबे कांही कुछु त मारे बर हाँथ उबाथे ।3।
लागहन एक कुरिया म पड़े रहिथन नोनी
पहिरे मइलाहा कपड़ा बइठे रहिथन नोनी ।4।
ओतकों म उनला लागत रहिथन बड़ गरु
घर ले निकाल देथे धरा के डंडा अउ चरु ।5।
अब मंदिर हमर आसरय मिटाथे हमर भूख
तुंहरे कस नोनी,मनखे मन हरथे हमर दुःख ।6।
चैतन्य जितेन्द्र तिवारी
थान खम्हरिया(बेमेतरा)

शनिवार, 28 मई 2016

पागा कलगी-10 //सुखदेव सिंह अहिलेश्वर

--: दार-भात :--
जय होवय तोर नोनी, 
मोला देवतहस दार भात।
मालिक के किरपा ले,
चमके तोर परताप।
भूख अउ भोजन अइसे जुरे,
जइसे आत्मा अउ परमात्मा।
पेट भर भोजन सबला पुरे,
बनिहार होवय के महात्मा।
खरे मंझनिया इही हाटकर,
बइठे बइठे गुनत रहेव।
भूंख के मारे कान के सनसन,
निमगा थोर थोर सुनत रहेव।
ततके खेवन तोर अवाज पायेंव,
एले बबा खालेवव दार भात।
जय होवय तोर बेटी,
मोला देवतहस दार भात।
बादर बरस के जुड़ोत हेवय,
धनहा कछार अउ भर्री ले।
सुरुज परकाश पुरोत हेवय,
फुलगी थांघा अउ जरी ले।
पुरवई रेंग के देखात हेवय,
सुवांस के डहर घेरी बेरी ले।
तइसने भुंख हरेक प्रानी ल सताथे,
नइ चिन्हय जात अउ पात ल।
जम्मो पेट के भुंख मिटाथे,
कोनो किन्चा नइ करय दार भात ह।
भुंखन लांघन गुनत रहेव,
मनके इही जजबात।
ततके खेवन धरके पंहुचगे,
मोर महतारी दार भात।
जय होवय तोर नोनी,
मोला देवतहस दार भात।
रचना:---सुखदेव सिंह अहिलेश्वर
गांव- गोरखपुर,कवर्धा
९६८५२१६६०२

शुक्रवार, 27 मई 2016

पागा कलगी-10//सुनील साहू"निर्मोही"

"तहुँ कुछु सीख़ ले भईया"
लईका मन के सबै मितान रथे,
अउ उज्जर ऊंखर ईमान रथे,
हाथ दया के देख नान्हे नान्हे।
तभे कहे लईका रूप भगवान रथे,
देख के सेवा मोर नोनी के ग....
अचरज म परे हे सबै देखईया।
तव तहुँ कुछु सीख़ ले भईया।।-2
---------------------
धन दौलत के करथन हम गुमान,
अउ बन जाथन हम बड़े सियान,
बड़ भारी परवचन सुनाथन??
अउ रहिथन दिनभर हम हलकान।
फेर दया धरम के काम करबो.....
देखे हन हम कतका कहईया।
तव तहुँ कुछु सीख़ ले भईया।।-2
---------------------
मनखे मनखे अपन म भुलाथे,
नोनी हमर धियान करा....थे,
बड़ सुघ्घर लगथे सेवा कर के।
आज लईका मन हमला सीखाथे,
कर दया तहुँ.....ले पीरा उधार....
फेर बिपत म बनहि तोर खेवईँया।
तव तहुँ कुछु सीख़ ले भईया।।
तव तहुँ कुछु सीख़ ले भईया।।।
सुनील साहू"निर्मोही"
ग्राम-सेलर
जिला-बिलासपुर
मो.8085470039

पागा कलगी-10//-हेमलाल साहू

@बेटी@
दया मया बेटी के हावे, अपना माने सबला जान।
देख बबा ला भूखा नोनी, करत हवय वो अन के दान।।
देख दया अतका नोनी के ,अंतस ले करथे परनाम।
श्रद्धा से आसूँ छलकत हे, तैय करे बड़ सुघ्घर काम।।
बेटा मोरो हावे नोनी, नइ आवय वो कुछ औ काम।
जांगर रहिते पूछिस मोला, अब करथे ओहा बदनाम।।
जिनगी भर राखेव ग पूँजी, पाई पाई मेहा जोर।
आज नई हे मोर ठिकाना, किंजरत हों मैं खोरे खोर।।
बोलिस नोनी मोर बबा गा, कउनो बेटा होय कपूत।
चल रहिबे मोरे घर मा तैं, अपन बनाहूँ तोला पूत।।
नोनी कहिस बबा झन होबे, तैहा मोर से कभु नराज।
बड़ भागी वो मानुष होथे, जेला मिलथे सेवा काज।।
बेटी बेटा सबो एक हे, कभू करव झन एमा भेद।
नर नारी से बसथे दुनियाँ, बेटी बर तब कइसे खेद।।
मान हेम के कहना संगी, सब करिहौ बेटी सम्मान।
सबके बेटी एक बरोबर, झन करहूँ एकर अपमान।।
-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़ जिला बेमेतरा
मो. नं.-9977831273

पागा कलगी-10//रामेश्वर शांडिल्य

बबा नातीन
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फूटपाथ म बैइठे बबा. 
भूखा बीमार लागथे ऩ
ओकर भूख भगाये ल.
नातिन भात सांग लानथे ऩ
"""""""""""""":""""""""""""""
सड़क म जीने वाला मन के.
ये हर कहानी हावे ऩ
अभाव गरीबी जीवन के.
भूख पियास निशानी हावे ऩ
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फोटू म तो बबा कुली के.
भेष म दिखथे ऩ
घाम म भुखाये थके.
अपन जिनगानी लिखथे ऩ
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पतरी म लाये भात सांग ल देख हाथ जोड लीस ऩ
नोनी के दया मया ल जान.
तरी ती मुंह मोड लीस ऩ
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नोनी जात दया मया के.
खजाना होथे ऩ
सुख दुख सब म. खुशी
के बीज बोथे ऩ
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दीया नई बरस बिना बातीन के ये फोटू आये बबा नातीन के ऩ
रामेश्वर शांडिल्य
हरदीबाजार कोरबा

बुधवार, 25 मई 2016

पागा कलगी-10//राजेश कुमार निषाद

।। पापी पेट के सवाल हे ।।
दर दर मैं भटकत हंव बेटी
देख मोर कईसन हाल हे।
मोर बर तै अतेक सुघ्घर भोजन लाने
खाहूँ मोर पापी पेट के सवाल हे।
लोग लईका ल पाल पोश के बड़े करेंव
फेर कोनो काम के नइये।
घर ले मोला बाहिर कर दिस
तभो ओमन ल चैन अराम नइये।
देवी बनके तै मोर करा आये
बेटी तोला मोर कतेक ख्याल हे।
तोर लाने भोजन ल मैं खाहूँ
मोर पापी पेट के सवाल हे।
सुघ्घर मानवता तै देखावत हस बेटी
फेर ये तो मोह माया के संसार हे।
आज तो तै मोला भोजन करावत हस
फेर मैं कहाँ जाहूँ न अब मोर घर द्वार हे।
सड़क किनारे मोर बसेरा बेटी
तन ढके बर न मोर करा चादर अऊ साल हे।
तोर लाने भोजन ल मैं खाहूँ बेटी
मोर पापी पेट के सवाल हे।
धन धन हे ओ दाई ददा
जऊन तोर जईसे बेटी ल जनम दे हे।
मोर जईसे गरीब अभागा करा
जऊन तोला भोजन धर के भेजे हे।
अईसन दाई ददा के मैं चरण पखारत हंव
जेकर तोर जईसन लाल हे।
तोर मया म मैं भोजन खाहूँ
मोर पापी पेट के सवाल हे।
रचनाकार÷ राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद ( समोदा )