बुधवार, 1 जून 2016

/‘छत्तीसगढ़ के पागा कलगी-11‘ के विषय//

छत्तीसगढ़ी कविता के प्रतियोगिता ‘‘छत्तीसगढ़ के पागा कलगी-11‘ के विषय रूपरेखा ये प्रकार होही-

समय- दिनांक 1/6/16 से 15/6/16 तक
मंच संचालक-श्रीअशोक कुमार साहू, भानसोज (छत्तीसगढ़ पागा कलगगी 4 के विजेता)
निर्णायक-
1.डां (श्रीमती) हंसा शुक्ला , वरिष्ठ साहित्यकार, रायपुर
2. श्री रामेश्वर वैष्णव, वरिष्ठ गीतकार, रायपुर
विषय - मंच संचालक द्वारा दे गे विषय -‘बेटी ला शिक्षा संस्कार दौ’
विधा- विधा कोनो बंधन नई हे, फेर रचना संक्षिप्त अउ गंभीर होय अइसे निवेदन हे ।

परिणाम घोषण 17/6/16

सोमवार, 30 मई 2016

पागा कलगी-10//देवेन्द्र कुमारध्रुव(डी.आर)

देखव ऐ लईका हमन ला सेवा के सन्देश देवत हे
बिना बोले सुन्दर अकन हमनला उपदेश देवत हे 
अपन हाथ ले भूखे मनखे ल खाये बर देवत हे
सवाल हे कईसे अमीर ला हर सुविधा आला मिल जथे
फेर गरीब ला काबर खाये बर एक निवाला नई मिले...
हमन बड़े बड़े धरम करम के बात करथन
सबके दुःख मन के मरम के बात करथन
फेर काबर कोनो निहे गरीब के मदद करईया
अइसन फोकट कतको बोलनेवाला मिलजथे
फेर काबर गरीब के अंतस ल टटोलने वाला नई मिले.....
गरीब तरसत रहिथे एक एक कांवरा बर
जिंदगी बिताये खातिर घर अउ चावरा बर
झोपडी ल घलो तोड़थे बड़े दूकान बनायेबर
बस केहे के गांव शहर म धर्मशाला मिल जथे
फेर गरीब सुते सड़क म कोनो देखने वाला नई मिले.....
जिहां देखबे तिहा ज्ञान विज्ञान के बात करे जाथे
हरियर धरती पर्वत पठार आसमान के बात करे जाथे
बोले अउ लिखाये के हरे सब अच्छा इंसान के बात करे जाथे
जेती देखबे तेती गाँव गाँव भले पाठशाला मिल जथे
फेर कोनो जगह नेकी के पाठ पढ़ाने वाला नई मिले ......
भगत मन के भीड़ पूजा म मगन पुजारी
बाहिर म कोढ़ के पीरा सहत बइठे भिखारी
कोनो सोन के छत्र चढावत हे कोनो चादर
दान पेटी भरे जगमग मंदिर देवाला मिल जथे
फेर सीढ़िया म बईठे गरीब ल कोनो शाल ओढ़ाने वाला नई मिले......
आज जेन बेटी हमर घर म उजियारा बगरात हे
अपन हाथ ले हमन ल रांध के सुघ्घर खवात हे
जानथे सब बेटी हमर कुल के मान बढ़ाही
फेर उही ला कतको कोख में मारने वाला मिल जथे
काबर कोनो ओकर बने बने जतन करने वाला नई मिले ....
आज बने हन ता गरब गुमान हे अभिमान हे
सब पलट जथे तुरते बेरा बड़ा बलवान हे
परहित सेवा ल आज अपन धरम बना लौ
काबर बने म कतको पूछनेवाला मिल जथे
हालत बिगडिथे ते कोनो आँसु पोछनेवाला नई मिले .....

रचना
देवेन्द्र कुमारध्रुव(डी.आर)
फुटहा करम बेलर
जिला गरियाबंद
9753524905

पागा कलगी-10 बर//पवन नेताम "सुरबईहा"

@@ तोला दस अंगरी के परनाम @@
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मोला अन्न देवइया तोला दस अंगरी के परनाम।
दस अंगरी के परनाम,का करव मै तोर गुनगान,मोला अन्न देवइया तोला दस..
@ कतको आइन कतको गइन, नइ कोनो ह देखीस।
दु दिन ले मे भुखे परे हव, कोनो ह नइ परखीस।।
तै हावस कतका सुजान..
मोला अन्न देवइया तोला...
लड़की- का करथस बबा कहा रहिथस।
@ भीख मांग के करथव गुजारा,कोनो मेर रहि जाथव।
मिल जाथे त खा- पी लेथव, नइ तो भुखे मै सो जाथव।।
मै हावव डोकरा अनाथ..
मोला अन्न देवइया तोला...
@ जुग-जुग तेहा जिबे बेटी, मोर हावय आशीर्बाद।
भला ते सबके करबे बेटी,रहिबे सदा अबाद।।
तै दुनिया म कमाबे नाम..
मोला अन्न देवइया तोला दस अंगरी के परनाम।।
********************
रचना- पवन नेताम "सुरबईहा"
ग्राम- सिल्हाटी, स/ लोहारा
जिला- कबीरधाम( छग)
मोबा- 9098766347

पागा कलगी-10 बर//लक्ष्मी नारायण लहरे , साहिल

मनिखे मन के हिरदे म सोग नइये .....
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मंदिर मस्जिद के रसदा म 
बैठे हे घर के सियान
रोवत हे ओ हर मने मन
आंखी के आंसू सुखा गेहे
अपन नाती बेटा के करत हे सुरता
घर के दरद ल हिरदे म बसाये हे
रसदा रेगैया मन ल निहारत हे
कोनो एक रुपया देवत हे त हाथ जोड़ के सिर झुकावत हे
अपन दरद छुपाके जीयत हावे
कोनो कभू जेवन करा देथे त
आंखी ल आंसू टपकत हावे
जिनगी के दरद ल कुलेचुप सहत हे
मंदिर मस्जिद के रसदा म
बैठे हे घर के सियान
रोवत हे ओ हर मने मन
मनिखे मन के हिरदे म सोग नइये
अपन दरद छुपाके जीयत हावे
कोनो कभू जेवन करा देथे त
आंखी ल आंसू टपकत हावे 


० लक्ष्मी नारायण लहरे , साहिल,
युवा साहित्यकार पत्रकार कोसीर रायगढ़

रविवार, 29 मई 2016

पागा कलगी-10 //-आशा देशमुख

दोहा ...
सरग नरक इंहचे हवे ,ये मनखे तैँ मान ,
जो जइसे करनी करे ,वइसे ही फल जान |
चौपाई
बइठे हावय भीख मंगैया |हाँका पारय सुन गा भइया |
मैं आवव गा अब्बड़ दुखिया | सुन गा दाऊ ये गा मुखिया |
भूख पियास म तरफत हावय | गीत भजन मा मन बहलावय |
दाई माई रानी दानी | देवव मोला दाना पानी |
वोला सुनके नोनी आइस |थारी भर के जेवन लाइस |
सुघ्घर गोठ मया के बानी |जइसे पागय आमा चानी |
अमरित कस जेवन हा लागिस | वो दुखिया के जीव जुड़ाइस |
ये नोनी तय हीरा बेटी | धरम करम हे तुहरे पेटी |
बेटी तै अस धरमी चोला | गड़य कभू झन काँटा तोला |
जेहर हावय दुख चिन्हैया |ओकर गोठ सुने कन्हैया |

दोहा ..
.देखय नोनी के मया ,दुखिया दिए असीस ,
ये बेटी जुग जुग जिओ , बन के राज रहीस |
-आशा देशमुख

पागा कलगी-10//चैतन्य जितेन्द्र तिवारी

.." जय हो तोर बेटी".........
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जय हो तोर बेटी धन्य हे तोर दाई ददा
पाए हे तोर कस लइका खुश रहिबे सदा ।1।
जब आथे सियानी लइकन छोड़ देथे साथ
जब आथे उंखर पारी खीच लेथे अपन हाँथ ।2।
सुग्घर राखय नइ बहु बेटा रंग रंग के सुनाथे
कहि देबे कांही कुछु त मारे बर हाँथ उबाथे ।3।
लागहन एक कुरिया म पड़े रहिथन नोनी
पहिरे मइलाहा कपड़ा बइठे रहिथन नोनी ।4।
ओतकों म उनला लागत रहिथन बड़ गरु
घर ले निकाल देथे धरा के डंडा अउ चरु ।5।
अब मंदिर हमर आसरय मिटाथे हमर भूख
तुंहरे कस नोनी,मनखे मन हरथे हमर दुःख ।6।
चैतन्य जितेन्द्र तिवारी
थान खम्हरिया(बेमेतरा)

शनिवार, 28 मई 2016

पागा कलगी-10 //सुखदेव सिंह अहिलेश्वर

--: दार-भात :--
जय होवय तोर नोनी, 
मोला देवतहस दार भात।
मालिक के किरपा ले,
चमके तोर परताप।
भूख अउ भोजन अइसे जुरे,
जइसे आत्मा अउ परमात्मा।
पेट भर भोजन सबला पुरे,
बनिहार होवय के महात्मा।
खरे मंझनिया इही हाटकर,
बइठे बइठे गुनत रहेव।
भूंख के मारे कान के सनसन,
निमगा थोर थोर सुनत रहेव।
ततके खेवन तोर अवाज पायेंव,
एले बबा खालेवव दार भात।
जय होवय तोर बेटी,
मोला देवतहस दार भात।
बादर बरस के जुड़ोत हेवय,
धनहा कछार अउ भर्री ले।
सुरुज परकाश पुरोत हेवय,
फुलगी थांघा अउ जरी ले।
पुरवई रेंग के देखात हेवय,
सुवांस के डहर घेरी बेरी ले।
तइसने भुंख हरेक प्रानी ल सताथे,
नइ चिन्हय जात अउ पात ल।
जम्मो पेट के भुंख मिटाथे,
कोनो किन्चा नइ करय दार भात ह।
भुंखन लांघन गुनत रहेव,
मनके इही जजबात।
ततके खेवन धरके पंहुचगे,
मोर महतारी दार भात।
जय होवय तोर नोनी,
मोला देवतहस दार भात।
रचना:---सुखदेव सिंह अहिलेश्वर
गांव- गोरखपुर,कवर्धा
९६८५२१६६०२