सोमवार, 15 अगस्त 2016

पागा कलगी-15//28// ललित वर्मा,"अंतर्जश्न"

बिसय: देस बर जीबो देस बर मरबो
देस बर जीबो देस बर मरबो, देस ल जबर बनाबो रे
बीते बरस के जगतगुरू ल,फेर पागा पहिराबो रे
ललकारत हे पाकिस्तान,चीन खडे हे छाती तान
कस्मीर अउ अरूनाचल म, जबरन बईठे हे बेईमान
अईसन सांप-छछूंदर मन ल, कूचर-कूचर के जलाबो रे
देस बर जीबो देस बर मरबो, देस ल जबर बनाबो रे
हुतकारत हे आज परधान, फूफकारत हे गबरू-जवान
जुरमिल देस ल टीप लेगेबर, जबर जोस संग धरे कमान
अईसन देस के अघुवा मन ल, कांध-मुडी म चढाबो रे
देस बर जीबो देस बर मरबो, देस ल जबर बनाबो रे
गडियाथे झंडा मंगलयान, सहराथे दुनिया के बिग्यान
ब्रम्होस हे ब्रम्हास्त्र बरोबर, बोफोर्स धरे हे अग्निबान
अईसन देस के गरब हवय त, काबर नई इतराबो रे
देस बर जीबो देस बर मरबो,देस ल जबर बनाबो रे
बीते बखत के जगतगुरू ल, फेर पागा पहिराबो रे
रचना:- ललित वर्मा,"अंतर्जश्न" 
छुरा

पागा कलगी-15//27//सुखदेव सिंह अहिलेश्वर

देश बर जीबो देश बर मरबो
आवव जुरमिल इही परन करबो,
देश बर जीबो देश बर मरबो।
कुकरा बासत नांगर धर जाबो,
खेती किसानी जांगर भर कमाबो।
सोनहा अन्न उपजाये खातिर,
धरती दाई के सेवा करबो।
भूंख गरीबी ल दुरिहा करे बर,
आवव संगवारी कमर कसबो।
देश बर जीबो देश बर मरबो।
आधा दिन हम जनता कर जाबो,
जनता जनार्दन के अशिष पाबो।
जेकर वोट से मंतरी बने हन,
ओकर किरपा करजा उतारबो।
समस्या ल उंकरो हल करे बर,
जोहारे चिट्ठी थइल म धरबो।
देश बर जीबो देश बर मरबो।
तोर उपर आंच नई आवन दन,
सरहद म मां तोर लाल खड़े हन।
दुश्मन मुड़ी टकराके फुट जही,
पहाड़ के पथरा सरिक अड़े हन।
देश के माटी के रक्षा खातिर,
बैरी के टोंटा म हाथ धरबो।
देश बर जीबो देश बर मरबो।
राष्ट्र निर्माता के उपाधी संग,
शिक्षा के भार भरोस खांध मढ़ाय हन।
शिक्षक के आदर मान संग,
नमस्ते गुरूजी के सम्मान पाय हन।
नवा पीढ़ी के उज्जवल रद्दा बर,
ज्ञान जोरन उंकर हांथ म धरबो।
देश बर जीबो देश बर मरबो।
आवव जुरमिल इही परन करबो,
देश बर जीबो देश बर मरबो।
रचना:-- सुखदेव सिंह अहिलेश्वर
गोरखपुर,कवर्धा

पागा कलगी-15//26//डोल नारायण पटेल

संगी जंवरिहा भाई बहिनी अउ जम्मो मितान जी,
अउ जम्मो मितान जी ।
मई बाप अउ लोगन लइका आवा सबो सियान जी,
आवा सबो सियान जी ।
बेरा हावे जुरमिल के सब, बेरा हावे जुरमिल के सब,
एक परन ला करबो जी, देश बर् जीबो जी देश बर् मरबो जी ।
सुघ्घर सुघ्घर भारत मैय्या के अंचरा हर धानी हावे,
के अंचरा हर धानी हाव ।
अन्न पानी के एकर अमृत दुनिया के महारानी हावे,
दुनिया के महारानी हाव ।
माटी के महिमा देवतन गाईन, माटी के महिमा देवतन गाईन ।
धुर्रा मुड़ मा धरबो जी, देश बर् जीबो जी देश बर् मरबो जी ।
भारत भुइंया के महिमा ला तुलसी बबा हर गाईन हे, तुलसी बबा हर गाईन हे ।
कोरा एखर गंगा बहथे धैन धैन एला बताइन हें, धैन धैन एला बताइन हें ।
धरम थापैया राम किशन के, धरम थापैया राम किशन के ।
कहे डगर मा चलबो जी, देश बर् जीबो जी देश बर् मरबो जी ।
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इशाई जम्मो बहिनी जम्मो भाई, जम्मो बहिनी जम्मो भाई ।
भारत माता के लइका हावन एके हावे सबके माई, एके हावे सबके माई ।
रकम रकम के फुलवा होके, रकम रकम के फुलवा होक ।
हरबा एके गढ़बो जी, देश बर् जीबो जी देश बर् मरबो जी ।
सबो तिरंगा लेके आवा आगू बढ़ते जाना हे, आगू बढ़ते जाना हे ।
बन्दे मातरम् बन्दे मातरम्, बन्दे मातरम् गाना हे,
बन्दे मातरम् गाना हे ।
एक डोरी मा बंध के रहिबो, एक डोरी मा बंध के रहिबो ।
काकरो ले नई दरबो जी, देश बर् जीबो जी देश बर् मरबो जी ।
धरम जात के कोनो झगरा में हमला नई परना हे, में हमला नई परना हे ।
गौतम गांधी अउ भगत के थाथी जतन ले धरना हे, थाथी जतन ले धरना हे ।
टेड़गा देखयेया के छाती मा, टेड़गा देखयेया के छाती मा ।
गोला बनके परबो जी, देश बर् जीबो जी देश बर् मरबो जी ।
जौन देश मा जनमेंन बाढ़ेन खेलेंन् कूदेंन् खाएन जी, खेलेंन् कूदेंन् खाएन जी ।
भारतवासी कहलाएंन् अउ अड़बड़ सुख ला पायेन जी, अड़बड़ सुख ला पायेन जी ।
ओकर मान ला राखै खातिर, ओकर मान ला राखै खातिर ।
जिंदगी अर्पन करबो जी, देश बर् जीबो जी देश बर् मरबो जी ।
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डोल नारायण पटेल
तारापुर - रायगढ़ छ0ग0

पागा कलगी-15//25//गुलाब सिंह कंवर "गुलाब "

तुलसी ,संत रविदास मीरा
गौतम नानक अउ कबीरा
किशन कन्हैया मथुरा म जनमीन
अवध पुरी रघुवीरा...
देवी देवता के धाम इहाँ
भीड भडक्का भारी .....
देस बर जीबो देस बर मरबो
जाऔ मैं बलहारी ......
इहाँ खेत खलिहान हे
गहू बाजरा धान हे
मेहनती मजदूर किसान इहाँ
संग संगवारी मीतान हे
कोदो कुटकी राहेर तिवरा
लगे हावय उन्हारी ........
देस बर जीबो देस बर मरबो
जाऔ मैं बल हारी .....
आनी बानी के बोली भाखा
धरम पंथ के अबड शाखा
मिलके सब रिथन इहाँ
न अड़चन ..न ..कोनो बाधा
अनेकता म एकता हमर
भारत के हावय चीन्हारी ....
देस बर जीबो देस बर मरबो
जाओ मैं बलहारी .......
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गुलाब सिंह कंवर "गुलाब "
मा .शा .-नवापारा
खरसिया
जिला -रायगढ़ छ .ग .

पागा कलगी-15 //24//ओमप्रकाश घिवरी

देश बर जीबो देश बर मरबो ।
धन हे मोर भारत, भुईयाँ के माटी ल,
देवत हे चारा सब ला , चीर के अपन छाती ल ।
अईसन महतारी के , सेवा ल करबो ।
देश बर जीबो , देश बर मरबो ।
खाँध म खाँध जोर के ,एके संग रहना हे ।
सबो परानी ल जुर मिल के , सुमत के रस्दा गढ़ना हे ।
मोर देश के माटी पबरित, ईही माटी मा तरबो ।
देश बर जीबो , देश बर मरबो ।
रचना
ओमप्रकाश घिवरी

पागा कलगी-15//23//ज्ञानु मानिकपुरी "दास"

"देश बर जीबो अउ देश बर मरबो"
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गीत
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बंदे मातरम् बंदे मातरम् गाबो
देश बर जीबो अउ देश बर मरबो।
1-भूल जावव संगी मज़हब के बात ल।
झन करव संगी मतलब के बात ल।
मनखे अव मनखे बनके रहव जी।
गीता के संग कुरान घला पढ़व जी।
हिन्दू-मुस्लिम,सिक्ख-ईसाई संग साथ रहिबो
देश बर जीबो अउ देश बर मरबो।
2-सरग ले सुघ्घर ये पावन धरा हे।
जिहा बहत तिरवेनि के अमरितधारा हे।
बैर,कपट ,राग,द्वेष ल छोड़व जी।
सबले भाईचारा के नता जोड़व जी।
ऊच-नीच, जाति-पाती के भेदभाव ल दूर करबो
देश बर जीबो अउ देश बर मरबो।
3-तोर सेवा करत कतको होंगे बलिदानी।
आज़ादी मिले हमला वीर सपूत मनके क़ुरबानी।
आवव सब जुरमिल के येखर जतन करि।
देश बर अपन जिनगी ल अरपन करि।
येखर सम्मान बर सदा लड़बो
देश बर जीबो अउ देश बर मरबो।
4-हरदम नेक रसता म चलबो।
देशसेवा,देशहित बर काम करबो।
मातृभूमि बर सदा निछावर रहिबो।
बईरी दुश्मन ल मज़ा चखाबो।
लहर लहर तिरंगा ल लहराबो।
देश बर जीबो अउ देश बर मरबो।
बंदे मातरम् बंदे मातरम् गाबो।
देश बर जीबो अउ देश मरबो।
ज्ञानु मानिकपुरी "दास"
चंदेनी कवर्धा
9993240143

पागा कलगी-15 //22//शुभम् वैष्णव

अपन देस बर जीबो-मरबो (चौपाई)
अपन देश बर जीबो मरबो।
जतना हिम्मत ततना करबो।।
मुड़ी घलो कटवा देबो जी।
मर के जस अमरत पाबो जी।।
एहि ह माता अउ एहि पिता।
एखर बखान ल करव कतका।।
महतारी हम मानबो अपन।
सुमरत रहिबो जी जनम जनम।।
एखर माटी जस सोना हे।
अमरत जइसे माँ गंगा हे।।
इहाँ सबो भगवान बसय जी।
जनम इहाँ बरदान हरय जी।।
सुन ले मोरो कहना भइया।
देश हरय ग साक्छात मइया।।
एखर तैं ह जतन तो करले।
अपन देश बर जीले मरले।।
खेत खार अउ बारी कोला।
माटी धरती माटी चोला।।
दुनिया भर के देव बसे हे।
सियान मन तो एहि कहे हे।।
दुसमन बइठे घात लगाए।
अपन करम ले जात बताए।।
मार नई तो मर जा तैं हा।
सहीद हो के तर जा तैं हा।।
भ्रष्टाचार ह एखर दुसमन।
बसे देस मा पापी जन-मन।।
चलव संघरावव तो भाई।
देस ल देस बनावव भाई।।
हरय संत महंत के धरती।
कइसे कोनो कबजा करही।।
सच के हिम्मत देखा देबो।
ए जिनगी अरपित कर देबो।।
-शुभम् वैष्णव
नवागढ़, बेमेतरा