रविवार, 16 अक्टूबर 2016

पागा कलगी -19 //3//सुखदेव सिंह अहिलेश्वर"अंजोर"

विषय:--हिंगलाज माई
विधा:--मुक्तक
(०१)
बहर-222 121 221 222 22
माई हिंगलाज ओ तोर महिमा न्यारी हे।
दाई हिंगलाज ओ तोर महिमा भारी हे।
लेवव तोर नांव अंजोर करदे जिनगी मा,
माता हिंगलाज ओ तोर जस हितकारी हे।
(०२)
बहर-222 212 222 221 2
तोरे मंदीर ओ दाई सीमा पार हे।
नदिया हिंगोल के दाई निरमल धार हे।
ल्यारी तहसील जे परथे पाकिस्तान मा,
करले स्वीकार भारत माँ के जोहार हे।
रचना:--सुखदेव सिंह अहिलेश्वर"अंजोर"
गोरखपुर,कवर्धा
9685216602

पागा कलगी 19//2//जगदीश "हीरा" साहू

हिंगलाज माई
बहर - 11112112122
दुःख हरले हिंगलाज माई।
सुख भरदे हिंगलाज माई।।
अब ककरो विसवास नइहे,
शरन म ले हिंगलाज माई।।
जगदीश "हीरा" साहू(१०१०१६)
9009128538

पागा कलगी -19//1//गुमान प्रसाद साहू

(1)बहर- 221 222 212 222
हिंगोल तट में तै हर बिराजे मईया।
कहिथे सबो तोला हिंगलाजे मईया।
हस सक्ति पीठो में एक तहूं महतारी।
परबत ऊपर तै आसन ल साजे मईया।
(2)बहर- 122 222 122 222 221 212
गुफा के अंदर हस बिराजे तै हर मईया हिंगलाज ओ।
सरण में आथे तोर हिन्दू मुस्लिम बनवाये ल काज ओ।
बनाये हस बिगड़ी तहीं मईया जइसे भगवान राम के।
बनाबे बिगड़ी वइसने सब तै हर मईया मोर आज ओ।
रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा (महानदी)
थाना-आरंग रायपुर छ.ग.
मो. :-- 9977313968

मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016

//पागा कलगी-18 के परिणाम//


संगी हो जय जोहार
सबले पहिली ये दरी परिणाम के घोषणा म होय देरी बर माफी चाहत हंव । नवरात्रि पर्व के कारण बेरा नई मिलत रहिस । दूसर निवेदन हे के ये प्रतियोगिता मापनी आधारित मुक्तक के प्रतियोगिता रहिस जेमा सीखे के दृष्टिकोण से भाव ले जादा महत्व के मापनी मा लिखना हे । ये बात के दुख के हे बहुत झन संगी मन बहर (मापनी) सही नई हे । ये प्रतियोगिता में केवल 10 रचना आइस ये कारण एक ले जादा विजेता घोषित नई करे जाते हे । मापनी के कसौटी म जउन खरा उतरिस ओ रचना ला विजेता के रूप म घोषित करे जात अउ पागा कलगी 18 के पागा भाई चोवाराम ‘बादल‘ के मुड़ म पहिराये जात हे ।
भाई चोवाराम ला बधाई देवत सबो संगी ला ये प्रतियोगिता भाग ले बर धन्यवाद संगे संग निवेदन के मुक्तक के बहर म अपन आप ला बांधे ये कोशिश जारी रखहू ।

शुक्रवार, 30 सितंबर 2016

पागा कलगी-18//10//सुखदेव सिंह अहिलेश्वर"अंजोर"

विधा:--मुक्तक
बहर-222 222 222 221 221 212
काफिया-अरत
रदिफ-हवय
(०१)
रतिहा के रिमझिम चिमनी टिमटिम तोरे अगोरा करत हवय।
चमकत बिजली गरजत बादर अड़बड़ जीवरा हर डरत हवय।।
दादू नोनी सोगे बपुरी तोरे फोटु कन गोठियात हे,
जल्दी आजा रे बेटा तै अब तो आंसु आँखी भरत हवय।।
(०२)
तोरे संसो करकर चोला हर बाती बरोबर जरत हवय।
बिन पेंदी के लोटा मन सबझन छाती म कोदो दरत हवय।।
छानी परवा बछरू गरुवा रस्ता तोर देखत रथन हमन।
जल्दी आजा रे लाला तै अब तो आंसु आँखी ढरत हवय।।
रचना:--सुखदेव सिंह अहिलेश्वर"अंजोर"
गोरखपुर,कवर्धा
9685216602

पागा कलगी-18//9//मिलन मलरिहा

नव दिनबर आबे दाई
कलजुग ल हटाबे दाई
घर घर महिसासुर खुसरे
पापी ल भगाबे दाई ॥
/
/
मिलन मलरिहा
मल्हार बिलासपुर

गुरुवार, 29 सितंबर 2016

पागा कलगी-18//8//दिलीप

बहर--222 112 221
नागर जोत लगा ले धान। 
खातू डार बढ़ा ले धान।
पानी देख मुही दे छेक।
पाके जेन कटा ले धान। 1
बहर--222 212 2
बछरू कस मेछरा झन।
लइका तै ईतरा झन।
परही अब मोर झापड़।
आगू ते मटमटा झन। 2
दिलीप