गुरुवार, 20 अक्टूबर 2016

//पागा कलगी-19 के परिणाम//


पागा कलगी-19 जेखर विषय-‘जय जय हिंगलाज माई‘ रहिस, ये विषय म मुक्तक लिखना रहिस । ये आयोजन मा कुल 9 रचना प्राप्त होइस ।  अभी भ्ी कई झन रचनाकार भाई के मुक्तक मा मात्रा गणना सही नई हे । हां, उन्खर सीखे के ललक हा जरूर हमर मन मा आशा जगाथे । अवइया समय हमर रचनाकार संगी मन विधा सम्मत रचना करहीं ।  ये आयोजन मा सबो संगी मन के प्रयास सराहनीय रहिस । आप सब ला येखर बर बधाई । पागा कलगी-19 के पागा ला भाई गुमान प्रसाद साहू के मुड़ मा पहिराये जात हे ।

भाई गुमान प्रसाद साहू ला, ‘छत्तीसगढ़ी साहित्य मंच‘ के डहर ले अंतस ले बधाई

रविवार, 16 अक्टूबर 2016

पागा कलगी -19 //9//जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

पागा कलगी -19 बर (गजल)
देख न हिंगलाजिन दाई
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देख न हिंगलाजिन दाई,
पाक ह पदोवत हे।
रातदिन हमर मेड़ो म,
गोला - बारी होवत हे।।
पाक के दुर्गम पहाड़ म,
ल्यारी मकराना के तीर।
बइठे दाई हिंगलाजिन,
भगत के भाग ल सिधोवत हे।।
श्री राम के बिगड़ी बनाय,
गोरख,नानक,मखान ल तारे।
गंगा कस हिंगला नदी,
तोर पाँव ल धोवत हे।।
दाई सती के मुड़ी गिरे ले,
बने नामी शक्ति पीठ।
मनाय बर तोला भगत मन,
चैत-कुंवार म जंवारा बोवत हे।।
भारत के जेन कान रिहिस,
तेन अलगाके कान अंइठत हे।
आतंकवाद ल अपनात हे,
दया-मया, ममता ल खोवत हे।।
कोटटरी रूप म हे दाई सती,
भोला बने भीमलोचन भैरव।
गजानंद बइठे तोर आघू म,
भक्ति रस ल मोंवत हे।।
पाक ल समझादे दाई,
तोर-मोर के भेद मिटादे दाई।
कलप-कलप के भारत महतारी,
रोजेच चार आँसू रोवत हे।।
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बालको(कोरबा)
9981441795
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पागा कलगी -19 //8//चोवा राम वर्मा "बादल"

बहर---1222 1222 1222 1222
गुफा गिरि चित्रकूपे हिंगुला के तिर बिराजे हे ।
भवानी हिंगुलाजे मंहमाई हर बिराजे हे ।
दुवारी मं बईठे लाल गनराजा बिघन टोरे
धियानी शिव ह भैरू रुप सऊंहे धर बिराजे हे ।
-------चोवा राम वर्मा "बादल"
------–---हथबंध 9926195747

पागा कलगी -19//7//दुर्गा शंकर इजारदार


माँ तू आएगी सोचकर ,आस लगाये बैठा हूँ ।
खोल दिल के दरवाजे मैं ,आँख बिछाये बैठा हूँ ।
चाहे दुश्मन हो जमाना,इसका क्या परवाह भला ।
तेरी ममता की छाँव का , आस लगाये बैठा हूँ ।


- दुर्गा शंकर इजारदार

पागा कलगी -19//6//देवेन्द्र कुमार ध्रुव

मुक्तक - 01
सरन मा हव मै हिंगलाज माई वो
साज दे बिगड़े मोर काज दाई वो
भगत ला अब तो अपन दरस देखा जा
राख ले अब ते मोर लाज दाई वो ......
मुक्तक -02
भगतन के दुःख हरे तै बुढ़ीमाई वो
झोली मा सुख भरे तै महामाई वो
डोंगर मा तै बईठे घटारानी माँ
कतको ठन रुप धरे तै दुर्गा दाई वो.....
रचना
देवेन्द्र कुमार ध्रुव (डीआर )
फुटहा करम बेलर
जिला गरियाबंद (छ ग)

पागा कलगी -19 //5//दिलीप वर्मा

विधा---मुक्तक
विषय----हिंगलाज दाई
बहर-222 222 22 212 121 222
कइसे के मेहर आवव,मोर हिंगलाजनी दाई।
कइसे के दर्शन पावव,मोर हिंगलाजनी दाई।
रहिथस जींहा दाई तें,तोर देश पाक बड़ पापी।
कइसे के मेहर जावव,मोर हिंगलाजनी दाई।
दिलीप वर्मा
बलउदा बजार

पागा कलगी -19//4//ज्ञानु मानिकपुरी "दास"

मुक्तक-1
बिगड़ी बनादे काज दाई।
रखले हमर वो लाज दाई।
तोरे चरण मा आय हावन
जय जय हो हिंगलाज दाई।
मुक्तक-2
तोर किरपा ले बन जाथे काम।
तोर किरपा ले सब पाथे नाम।
तोर गुनके कोने पाही पार
तोर मिल सब सेवक गाथे नाम।
ज्ञानु मानिकपुरी "दास"
चंदेनी कवर्धा
9993240143