सोमवार, 13 जून 2016

पागा कलगी-11//अमन चतुर्वेदी *अटल*

मोर दुलउरिन बेटी
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सुघ्घर राग सुनावत हे
महर महर महकावत हे
मोर मुड़ के पागा बनगे
मोर दुलउरिन आवत हे
जनम धरिस मोर घर मे
अंगना मे खुशी छागे
मोर गोदी मे खेल कुद के
घर ला मोर महकादिस
मोर दुलउरिन बेटी ला मैं
पढायेंव लिखायेंव सिखा के
अपन संग मोला संगी बनाके
मोर घर अंजोर बगरावत हे
मोर मान ला बढाइस बेटी ह
जग म नाम कमावत हे
मोर कुटुम्ब ला तारिस संगी
आज दुसर कुल ला तारत हे
मोर मयारु बेटी आवत हे
गांव ला आज महकावत हे
बेटी के आये ले आज संगी
जग मे खुशी बगरावत हे
उही पाय के काहत हंव संगी
बेटी ला पढ़ाव बेटी ला बचाव
सिक्छा अउ संस्कार देवव
सबके मान ला आज बढा़वत हे
मोर घर अंगना ला तार दिस
अब कोनो के कुल ला तारत हे
मोर दुलउरिन मयारु बेटी ह
आज महर महर महकावत हे
बेटी बनगे बहिनी बनगे नोनी ह
कोनो घर के बनत हे बहुरिया
मया म हम बंधागेन नोनी के
बनादिस सब ला संगी जहुंरिया
अपन घर के मान बढ़ावव
बेटी पढ़ावव बेटी बचावव
आज मया.के गीत सुनावत हे
मोर दुलउरिन बेटी आवत हे
मोर दुलउरिन बेटी आवत हे
�अमन चतुर्वेदी *अटल*
बड़गांव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
09730458396

पागा कलगी-11//चोवाराम वर्मा "बादल"

बेटी ल शिक्षा अउ संस्कार दौ
बेटा कस मया दुलार दौ।
बेटी फुलकैना ,कोयली मैना
जिनगी म रस भर देथे।
दाई ददा के बन दुलौरिन
हिरदे के दरद हर लेथे।
बेचारी झन बनै,उबार दौ। ।
मइके ससुरे दुनो मुहाटी,
बेटी अंजोर बगराथे।
एक जगा कन्या रतन त,
उँहा धन लछमी कहाथे।
जग के जगतारण ल,सिंगार दौ
बेटी ल शिक्षा अउ संस्कार दौ
गऊ माता कस निच्चट सरु,
सब जोर जुलुम सहि लेथे।
मुंह फुटकार कभु नई कहय
बस चुपे चाप रो देथे ।
ए गंगा ल धरती म उतार दौ।
बेटी ल शिक्षा अउ संस्कार दौ
जेन कथे पर धन बेटी,
बड़ मुरख अज्ञानी हे ।
कन्यादान महादान जेन,
समझिच तेन बड़ गियानी हे।
बहु घलो बेटी ए,सम्मान दौ ।
बेटी ल शिक्षा अउ संस्कार दौ
(रचनाकार--चोवाराम वर्मा "बादल")

रविवार, 12 जून 2016

पागा कलगी-11//ललित टिकरिहा

बेटी ला कमती झन जानव,
बेटा ले अलगे झन मानव,
नवा सुरुज जुर मिल के लानव
जिनगी म उजियारा लाय बर
भाग ल इंखर संवार दव
बेटी ल शिक्षा अउ संस्कार दव।
दाई ददा के दुनिया म जगमग,
कतको नाम करत हे बेटी मन,
नई घुँचत हे पाछु थोरको अब
सब काम करत हे बेटी मन,
अब हिम्मत ल इंखर जान लव
बेटी ल शिक्षा अउ संस्कार दव।
बेटी दया मया के सागर हे,
परेम के छलकत गागर हे,
दू ठन कुल के मान खातिर,
जिनगी जेकर निवछावर हे,
दुर्गा , लछमी जस मान दव,
बेटी ल शिक्षा अउ संस्कार दव।
घर अंगना के सम्मान बेटी,
दाई ददा के पहिचान बेटी,
किरन , कल्पना ,नीरजा सुनीता,
सरग छुवइया महान हे बेटी,
महानता ल इंखर सम्मान दव,
बेटी ल शिक्षा अउ संस्कार दव।।
🙏
रचना...............
11-06-2016 📖
🙏ललित टिकरिहा🙏
सिलघट(भिंभौरी)

शनिवार, 11 जून 2016

पागा कलगी-11//सूर्यकांत गुप्ता

बेटी ला शिक्षा अउ सन्सकार दौ
बिन शिक्षा सँसकार के, जिनगी बिरथा जान।
मानुस तन हम पाय हन, बन के रहन सुजान।।
बेटा अउ बेटी घलो, शिक्षा के हकदार।
संस्कार के आज हे, दूनो ला दरकार।।
नर नारी बिन जगत के, रचना कइसे होय।
कोख म बेटी जान के, मनखे काबर रोय।।
दाई देवी मान के, पूजौ पथरा चित्र।
घर मा ओकर प्रान के, काबर भूखे मित्र।।
मन के मैला ला घुरुवा मा डार दौ।
बेटी ला शिक्षा सँसकार दौ।।
देखौ बेटी मन बढ़ चढ़ के कइसे आघू आइन।
जीवन के हर क्षेत्र मा देखौ कइसे नाव कमाइन।।
रानी लछमी के कुरबानी कइसे कउनो भुलाही।
मदर टेरेसा के ममता के सबला सुरता आही।।
अंतरिक्ष के सैर करइया कल्पना भर नोहै।
बेटी कल्पना चावला नाव जगत मा सोहै।।
खेल जगत मा चमकिन बेटी, सानिया सायना जानौ।
मेरी कॉम के बॉक्सिंग क्षमता काबर नइ पहिचानौ।।
शासन के तो सबो महकमा, बिटिया मने सम्हालैं।
मऩोरंजन के छेत्र मा देखौ, डंका अपन बजालैं।।
कतका कतका नाँव गनावौं, लंबा हावै सूची।
मानैं इँखर जीवन शैली, सफल होय के कूची।
फेसन संग मरजादा अउ सालीनता अपनालौ।
दुराचार व्यभिचार ले भाई, बेटी मन ल बचा लौ।।
अलग अलग कर्तव्य निभाथे, मइके ससुरे बेटी।
सबके सुख दुख मा तो आखिर कामेच आथे बेटी।।
मन ले दाई ददा सबो झन, बेटी के अवतार दौ।
ओकर सदा सुखी जीवन बर शिक्षा अउ संस्कार दौ।।
जय जोहार...
सूर्यकांत गुप्ता
1009 लता प्रकाश,
वार्ड नं. 21, सिंधिया नगर
दुर्ग (छ. ग.)

पागा कलगी-11//सुधा देवांगन

बेटी बर सिक्छा अऊ
संस्कार
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विकसित होथे दुनिया देश समाज,
बेटा ले बंस बेल बाढ़थे किथें
दुनिया के अजब होगे रिवाज।
बेटी ददा के दुलारी,दाई के संगवारी ए ,
भाई बर मया,सनेह के छलकत
गंगार ए।
बेटा ले कम झन समझव,नो है
धरती के भार
बेटी हे धरती के आधार।
दु आखर पढ़ लिख लिही नई
जावय बेकार,
ओ हर कोयली ए बोहावत रसधार,
ओकय ले हावय जिनगी मेरी झनकार।
दु कुल के मान बढ़ाथे दूर होथे
अंधियार,
बेटी ह थामहे हावय संसकीरिती
अऊ संसकार।।
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सुधा देवांगन
क्वा. नं.--99/B/1
बालको नगर कोरबा
(छ. ग.)

पागा कलगी-11//ललित साहू "जख्मी"

"बेटी के सिक्छा अऊ संस्कार"
जेखर कोरा ले जनम धरेंन
वो दाई के सम्मान जरुरी हे
जेखर दम ले दुनिया टिके हे
वो नारी के पहिचान जरुरी हे
बेटी करही अंजोर ये जग मा
फेर पहिली सिक्छा के दान जरुरी हे
समाज के सुग्घर आघू बढ़े बर
बेटी ला संस्कार के वरदान जरुरी हे
भेदभाव मेटा के बेटी-बेटा ला
एक समझईया खानदान जरुरी हे
रद्दा भटकत लोग लईका मन बर
हमर संस्कृति के गियान जरुरी हे
देवव ऊंच ले ऊंच सिक्छा बेटी ला
बेटी के अब बढ़ाना मान जरुरी हे
देवव संस्कार जनम ले हर बेटी ला
कलजुग मा देना धियान जरुरी हे
अब बंद करो ननपन के बिहाव
बिधवा के फेर अब बिहाव जरुरी हे
लेसईस गोसान संग आगी मे नारी
कुरीति के खच्चित मेटाव जरुरी हे
जम्मो समझे जम्मो बात ला अइसन
समाज मा सिक्छा आना जरुरी हे
बेटी जिनगी के पहिली अधार हरे
वोखर सिक्छा,संस्कार पाना जरुरी हे
रचनाकार - ललित साहू "जख्मी"
ग्राम - छुरा
जिला- गरियाबंद (छ.ग.)
9144992879

पागा कलगी-11//चैतन्य जितेन्द्र तिवारी

"बेटी ला शिक्षा अउ संस्कार दव"
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बेटी पढ़य अउ बेटी बढ़य
अइसन शिक्षा अउ संस्कार दव ।1।
पढ़ लिख के बनय आत्मनिर्भर
अइसन सुग्घर ज्ञान के भण्डार दव ।2।
अरे झन मारव बेटी ला गरभ म
झन करव महापाप, जीवनदान दव ।3।
बेटी करत हे अब बेटा कस काम
थामौ ओखर हाँथ दुनिया म आन दव ।4।
घर म हे नारी त सुख हे बड़ भारी
समझ मरम ला ए बात म धियान दव ।5।
बेटी हमर नौ कन्या इही दुर्गा दाई
झन समझौ अबला,मान सम्मान दव ।6।
नारी के महिमा पुरान सुनावत हे
मनखे कहत हे अउ कईसे परमान दव ।7।
भगवान घलोक अब गुनत होही
कइसे समझावव अउ का सद्ज्ञान दव।8।
बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ मुहिम ला
चलव जम्मों जुर मिल के अब साथ दव ।9।
अरे अब तो जागव अउ जगावव
भेदभाव ला मिटाए बर हाथ म हाथ दव ।10।
चैतन्य जितेन्द्र तिवारी
थान खम्हरिया(बेमेतरा)