गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

पागा कलगी -4//हर्षल यादव

छत्तीसगढ़ी कविता प्रतियोगिता
छत्तीसगढ़ के पागा कलगी भाग - ०४
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सरग निसईनी
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जिहा नीलगगन मिलाफ होवाथे
सागर अमृत जल बरसावाथे।
चंदाके अंजोरी रात मा
मोर छत्तिसगढिया दाइ
सरग नीशयनी बनावाथे
भाखा के गूरतुर बोलि
पवनराज सुनावाथे
देख अपरिचित बेला
रात भि मुस्कावाथे
करम करम के पयडगरी मा
चमन बहार बिछावाथे
आज अपन लइक ला
सरग के राह दिखावाथे
धन्य हे मोर छत्तीसगढिया महतारी
माथ हमन नमावाथन
तोर मया के अंजोरीला
जम्मो मे बगरावाथन
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रचना - हर्षल यादव
वरोरा,चंद्रपूर ,महाराष्ट्र

बुधवार, 24 फ़रवरी 2016

पागा कलगी - 4 //दिनेश देवांगन "दिव्य"

 चित्राधारित मोर गीत
"कइसे उतरे तोर देउता"
सड़क सूना सरग के हावय, सूना हावय द्वार !
कइसे उतरे तोर देउता, बढ़गे पापाचार !!
राम भरत कस नइये भाई, नई सुदामा मीत !
नइये बेटा अब सरवन कस, होगे अइसे रीत !!
घर घर रावण बइठे हावय, नई राम अवतार !
कइसे उतरे तोर देउता, बढ़गे पापाचार !!
मनखे मनखे होगे दुसमन, पइसा के बस मोल !
हालत देखँव जब धरती के, हिरदय जाथे डोल !!
पेट भरे बर नारी करथे, अपने देह बयापार !
कइसे उतरे तोर देउता, बढ़गे पापाचार !!
लछमी माता गऊँ मात ला, मानय पहिली लोग !
माँस चीर के ओखर तन ले, करथे अब तो भोग !!
माँस खवइया दानव ले अब, भरगे ये सनसार !
कइसे उतरे तोर देउता, बढ़गे पापाचार !!
बेटी बोझ ददा बर होगे, कोख उजारे आज !
पनही समझे पग के ओला, कइसे तोर समाज !!
दाई तोर घलव इक बेटी, मानँव गा उपकार !
कइसे उतरे तोर देउता, बढ़गे पापाचार !!
काट काट के पेट ला अपन, देथें अन्न किसान !
तीपत गरमी अउ जाड़ा मा, करथे कर्म महान !!
आज झूलथे वो हर फाँसी, बना घेंच के हार !
कइसे उतरे तोर देउता, बढ़गे पापाचार !!
सड़क सूना सरग के हावय, सूना हावय द्वार !
कइसे उतरे तोर देउता, बढ़गे पापाचार !!
दिनेश देवांगन "दिव्य"
सारंगढ़ जिला - रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
9827123316
9617880643

पागा-कलगी क्रमांक 4//चैतन्य जितेन्द्र तिवारी


(भुईयाँ ला सरग बनाबो गा)
......."....."....."......"......
चलव हो संगी जुर-मिल के
भुईयाँ ला सरग बनाबो गा...
भुईयाँ लगय ये सरग कस
चल अइसन रद्दा बनाबो गा.....
नरक हे जीवन बिन शिक्षा के
शिक्षा के मरम ला बताबो गा...
बिद्या ला कइथे मनखे के गहना
चल शिक्षाके अलख जगाबो गा..
चलव हो संगी जुर-मिल के.....
बेटी ला पढ़ाबो बेटी ला बचाबो
पढ़ाके आत्मनिरभर बनाबो गा...
बेटी हमर दोनों कुल ला तारहि
चल नारी ला साक्षर बनाबो गा...
चलव हो संगी जुर-मिल के.......
भुईयां हमर मरत हे पियास
भुईयॉ के पियास बुझाबो गा..
खूब बरसहि बरसा के पानी
चलव जुर-मिल पेड़ लगाबो गा..
चलव हो संगी जुर-मिल के
भुईयां ला सरग बनाबो गा...
भुईयाँ लगय ये सरग कस
चल अइसन रद्दा बनाबो गा..
चैतन्य जितेन्द्र तिवारी
(थान खम्हरिया)
CR...............

पागा-कलगी क्र.4 //सुनिल शर्मा"नील"

"""चलव बनाबो अइसन दुनिया"""
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जिहां बेटी ल जीए के अधिकार मिलय
दहेज खातिर कोनो बलि झन चढ़य
झन होवय आत्महत्या किसान के
जुरमिल खावय सब रोटी ईमान के
गिरय अमीरी अउ गरीबी के भीतिया
झन सोवय कोनो भूखे पेट रतिहा
साफ-सफई रहय गाँव,गली,खोर
शिक्षा के फइलय घर-घर अंजोर
चलव बनाबो अइसन ..............
झन रहय कपट अउ जलन के खाई
मिलय राम ल भरतलाल कस भाई
न नसा रहय,न रहय नास के जर
बोली मया-पिरित के होवय घर-घर
भारत म बिकास के गोंदा फुलय
धन के गरब म कोनो झन झूलय
आतंकवाद कभू मुड़ी झन उठाय
सीमा म बेटा परान झन गवाय
चलव बनाबो अइसन ...............
भ्रष्टाचार के हो जावय देश ले नाश
सुवारथ के कोनो झन बनय दास
झन घुमय लइका पढ़ लिख निरास
पूरा होवय सबके रोजगार के आस
सियान ल मिलय अतका सनमान
खोजे मत मिलय वृद्धाश्रम के नाम
भुइयां बचाय बर होय जागरूकता
लहरावय "तिरंगा" होवय अइसन बुता|
चलव बनाबो अइसन .............
*********************************
सुनिल शर्मा"नील"
थान खम्हरिया,बेमेतरा(छ.ग.)
7828927284
9755554470
दिनाँक-24/02/2016
CR

पागाकलगी 4//आशा देशमुख


इही सरग के रद्दा असन
इही सरग के रद्दा आसन
धरती म रद्दा बनाबो ग
ऊँच नीच के भेद मिटाके
मया के रीत चलाबो ग
अपन करम म भाग छुपे हे
मेहनत से चमकाबो ग
सुणता से सब हाथ मिलाके
पथरा म गंगा बोहाबो ग
दया धरम रखबो थारी म
सच के चंदना लगाबो ग
हमर देवी धरती दाई ल
लहर लहर लहराबो ग
-आशा देशमुख

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2016

पागा कलगी 4//देवेन्द्र कुमार ध्रुव

 //का सरग का नरक मैहर नई जानव// 

काहे दुनो के फरक मैहर नई जानव
हा जिहा सबला मया अउ दुलार मिलथे
सरग के दरवाजा उही घर ले खुलथे...
सब अपन तरक्की के सीढ़ी बनावत हे
सभ्यता संस्कृति ला नवा पीढ़ी भुलावतहे
जेन घर में पहुना ला सत्कार मिलथे
सरग के दरवाजा उही घर ले खुलथे ..
परिवार सुग्घर जिहा मिलके रहिथे
दुःख पीरा ला जिहा सबो मिलके सहीथे
बुजुर्ग सियान ला जिहा आदर मिलथे
सरग के दरवाजा उही घर ले खुलथे ..
सब बर सम्मान जिकर अंतस मा
सबके मदद करे जेन मन संकट मा
जेन मन सब बर मददगार रहिथे
सरग के दरवाजा उही घर ले खुलथे ..
खाली हाथ कभु नई जावन दे कोन्हों ला
तकलीफ कभु नई पावन दे कोन्हो ला
जिहा ले सबला ख़ुशी के उपहार मिलथे
सरग के दरवाजा उही घर ले खुलथे..
जिहा हर कोई देश के सम्मान करथे
अपन संस्कृति के गुणगान करथे
जिहा हर झन बलिदान बर तैयार मिलथे
सरग के दरवाजा उही घर ले खुलथे ..
मीठ बोली सुग्घर मया के भाखा
नई रहय जिहा कोनो कोती निराशा
सुख शांति के जिहा हरदम बयार चलथे
सरग के दरवाजा उही घर ले खुलथे..
रचना
देवेन्द्र कुमार ध्रुव
बेलर जिला गरियाबंद 9753524905

रविवार, 21 फ़रवरी 2016

पागा कलगी भाग-- ४//हेमलाल साहू

पागा रचना 04 बेर मोरो थोकुन परयास
ये सरग के रद्दा ल खोलव
अपन करम मा जीनगी गढ़व।
ये सरग के रद्दा ल खोलव।।
चल रे संगी मोरे चलव।
सच के ये रद्दा ला धरव।।
दाई ददा के जतन ल करव।
गुरु के बताये रद्दा चलव।।
सच के रद्दा टेडगा हवय।
करम करइया बर सरल हवय ।।
सच के रद्दा सरग दिखावय।
पाप के रद्दा नरक ले जावय।।
करम म लेखा जोखा हावय।
जे सरग नरग रद्दा हावय।।
सच बोले अड़बड़ सुख हावय।
जइसन जगा सरग के हावय।।
सच के अंजोर जगमगावय।
तोर सच ला जान गुन गावय।।
देख भगवन तोला भुलावय।
सरग के दुवारी दिखावय।।
अपन करम मा जीनगी गढ़व।
ये सरग के रद्दा ल खोलव।।
हेमलाल साहू