सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

‘छत्तीसगढ़ के पागा कलगी 05 के विषय

//छत्तीसगढ़ी कविता के प्रतियोगिता ‘छत्तीसगढ़ के पागा कलगी 05 के विषय//
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दिनांक-1 मार्च से 15 मार्च 2016
विषय- हमार नदावत खेल (छत्तीसगढ़ के जुन्ना खेल)
विधा - विधा रहित
मंच संचालक-श्री अशोक साहू, भानसोज (पागा 5 के विजेता)
निर्णायक-दीदी शकुंतला शर्मा अउ दीदी शकुंतला तरार
संगी हो दे गे विषय मा आप अपन रचना लिख के ओखर उपर
‘छत्तीसगढ के पागा-कलगी क्र-5‘ बर रचना लिख के ये मंच मा पोस्ट कर सकत हंव या नीचे पता मा भेज सकत हव-
1- rkdevendra4@gmail.com
2-suneelsharma52.ss@gmail.com
3- whatsapp-9977069545
4-whatsapp-+917828927284
5-whatsapp-+919098889904
6whatsapp 9770330338
आशा हे ये नवा प्रारूप मा आप मन के सहयोग मिलत रहिही अउ पहिली ले जादा रचना आही ।
-छत्तीसगढ़ी मंच,छत्तीसगढ़ी साहित्यिक समूह

पागा कलगी ४//ललित वर्मा, छुरा


🙏भोंदू-भवानी के गोठ🙏
भोंदू: ये सिढिया वाला फोटू ह का हरे ग भईया?
भवानी: ये सरगनिसईनी ताय जी भाई
भोंदू: कईसन भईया,बने फोर के बता न गा
भवानी: ले सुन त-----
बढ़िया करम ल करबे भाई,-२
सरग म तैं चढ़ जाबे
रद्दा ल चलबे मानवता के,
सरग ले उपर जाबे
करम ह तोर गिनहा रखबे त,
नरक म तैं गिर जाबे
अउ कोन जनी फेर कब भाई,
ये मानुस तन ल पाबे
रद्दा चलबे---------
सेवा कर जी दाई-ददा के,
सरवन तैं कहाबे
सत बर जीबे सत बर मरबे त,
ए सिढिया ल पाबे
रद्दा चलबे-------
दीन-दुखी के पीरा हर तैं,
असीस पिरीत कमाबे
दया-मया के बीजा ल बोके,
परमानंद फल खाबे
रद्दा चलबे---------
बढ़िया करम ल करबे भाई,-२
सरग ल तैं चढ़ जाबे,
रद्दा चलबे मानवता के,
सरग ले उपर जाबे
सरग ले उपर जाबे।।
रचना:-ललित वर्मा, छुरा
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

पागा कलगी ४ // ललित टिकरिहा

छत्तीसगढ़ के पागा कलगी क्रमांक 4
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           बर रचना
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"सरग के सीढ़िया म चढ़ लौ"
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चलव जिनगी ला अपन गढ़ लौ,
धरम के रद्दा म आगु बढ़ लौ,
दाई ददा के सेवा जतन ल करके,
सरग के सीढ़िया म चढ़ लौ।
सरग के सीढ़िया म चढ़ लौ।।
जिनगी के डोंगा खोय बरोबर,
धरती मा बिजहा बोय बरोबर,
सरवन कस कांवर  म धर लौ
सरग के सीढ़िया म चढ़ लौ।
सरग के सीढ़िया म चढ़ लौ।
ये जिनगी के हरय देवइया,
इहि हरय जी करम लिखईया,
दाई  ददा  के  पइया  पर लौ,
सरग के सीढ़िया म चढ़ लौ।
सरग के सीढ़िया म चढ़ लौ।।
अपन लहू ल बना के पसीना,
भाग ल हमर सुग्घर सजईया,
करके सेवा भवसागर तर लौ,
सरग के सीढ़िया म चढ़ लौ।
सरग के सीढ़िया म चढ़ लौ।।
संतन मन जेकर मरम बताये,
मानुष तन बड़ भाग ले पाये,
मउका ला झन बिरथा कर लौ,
सरग के सीढ़िया म चढ़ लौ।
सरग के सीढ़िया म चढ़ लौ।।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
..................✍
🙏✏ललित टिकरिहा✏🙏
२७-२-२०१६

पागा कलगी - 4//सूर्यकांत गुप्ता

छत्तीसगढ़ के पागा कलगी - 4
छत्तीसगढ़ के पागा कलगी चार
गुनत हौं मने मन, कइसे पांव मड़ाई
सरग के पहिलिच सिढ़िया मा यार
रग रग मा मोर भरे सुवारथ
कंहा लुकागे तैं परमारथ
कइसे भुलागे जिनगी के दिन चार
गुनत हौं मने मन कइसे पांव मड़ाई
सरग के पहिलिच सिढ़िया मा यार
ददा दाई ला संग नई राखन
बने असन तको नई भाखन
काबर लागैं बपुरा बपुरी बेटा बहू बर भार
गुनत हौं मने मन कइसे पांव मड़ाई
सरग के पहिलिच सिढ़िया मा यार
कलजुग के परताप ये भाई
छोड़ अपन दूसर बर धाई
रात दिन सुख खोजत रहिथन
पाप के तरिया मा खाली डुबकी मार
गुनत हौं मने मन कइसे पांव मड़ाई
सरग के पहिलिच सिढ़िया मा यार
जय जोहारर।।
सूर्यकांत गुप्ता
1009 सिंधिया नगर दुर्ग 

पागा कलगी 4//अमन चतुर्वेदी "अटल"

विषय - चित्र अधारित 
"सरग निसइनी"
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जिनगी के मोर लगे हे दांव
कइसे बढ़ावंव मोर पापी पांव
झूठ लबारी रग रग म बस गेहे
कइसे मिलही मया के छांव
सरग निसइनी के लगे हे आस
फेर कोनो गुन नइ हे मोर पास
दाई ददा ला कभु मानेंव नही
कोनो ला अपन जानेंव नहीं
ये स्वारथ के दुनिया हे
महु भुला गेंव स्वारथ में
दान धरम कभु जानेंव
मर गेंव सकल पदारत में
सरग निसइनी के दिखत हे छांव
फेर माड़ नइ पावत हे मोरो पांव
मैं मुरख हौं अग्य़ानी हौं
जिनगी के मोर लगे हे दांव
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रचना -अमन चतुर्वेदी "अटल"
बड़गांव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
मोबा :- 0973045839

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

पागा कलगी 4// ललित साहू "जख्मी"



सरग की सीढीया

सीढीया देखाय सरग के
हर बखत सबला भगवान
तोर मोर मे सब फंदा गे
भुला गे एकता के ज्ञान

जोरिया के धरती आकाश ला
देखाय हे अपन कला विज्ञान
वोकर सिरजाय कन - कन हरे
मईनखे, माटी अऊ ये जहान

सबके गोड मया के डोर बंधाय
मोहाय हे मितानिन बर मितान
हो जाही माटी के चोला माटी
अबुझ मईनखे हे गा अनजान

भटकत जीव खोजत रद्दा सरग के
करत हे पूजा घोलण्ड के उतान
करो बिन स्वारथ जीव सेवा
सरग के सीढीया इही तै जान

जे चढ जात हे दु सीढीया कनहो
समझत हे खुद ला बड. महान
कतको तै जेवर गहना लाद ले
संगवारी हे फकत जात ले समसान

अपन करनी कई जुग ले भोगबो
जेन करबो दाई ददा ला हलाकान
कहां खोजत हस रे मईनखे तेहा
इही तो हरे धरती के भगवान ।।

रचनाकार - ललित साहू "जख्मी"
ग्राम- छुरा जिला - गरियाबंद (छ.ग.)
मों. नं - 9144992879

गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

पागा कलगी 4//अशोक साहू


।सरग पाये बर सिढिया।

कतको कूद ले भूंईया म
ऊंच आगास छुवावय नहीं।
करम सच्चा करे बिना
सरग ह टमरावय नहीं।
जाना हे ऊंचहा जगा तोला
सीढिहा चढहेच ल परही।
मन म राख भरोसा संगी
रसता गढहेच ला परही।।
फूंक फूंक के पांव मढहा ले
एकक सिढिहा चढहत जा।
लहुट झन देख पाछू डाहर
आगु डाहर बढहत जा।।
सरग चढहे के सिढिहा तौर बर
दया धरम अउ सत ईमान।
ईही करम अपनाबे संगी
पाबे सरग अऊ बनबे महान।।


अशोक साहू, भानसोज