।।कलेवा।।
छत्तीसगढ़ के कलेवा बढ़ सुघ्घर लागथे ग।
आनि बानी के पकवान बने हे गजब के स्वाद आथे ग।
खीर पुड़ी बड़ा सुहारी।
घर म बनाये दीदी बहिनी अऊ महतारी।
पड़ोसी घलो येकर गोठ गोठियाथे ग।
आनि बानी के पकवान बने हे गजब के स्वाद आथे ग।
ठेठरी खुरमी अऊ नमकीन के बात निराला हे।
महर महर महके जे भजिया गुलगुला हे।
ये भजिया ल देख बबा के मुंह म पानी आथे ग।
आनि बानी पकवान बने हे गजब के स्वाद आथे ग।
होवत बिहनिया घर म बनय मुठिया रोटी अऊ चीला।
दतवन मुखारी करके खाये सब माईपीला।
रसगुल्ला अऊ बालुसाय के का कहना हे।
जलेबी ल देख के सबके लार टपकना हे।
अइरसा रोटी अऊ चउसेला मिरचा भजिया सब ल भाथे।
आनि बानी के पकवान बने हे गजब के स्वाद आथे।
परसा पान म बने अंगाकर रोटी सबके मन भाये।
टमाटर चटनी संग दबा के येला खाये।
ये हमर कलेवा खाये बर सब एक दूसर ल बलाथे।
छत्तीसगढ़ के कलेवा बढ़ सुघ्घर लागथे।
आनि बानी के पकवान बने हे गजब के स्वाद आथे।
रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद ग्राम चपरीद ( समोदा )
9713872983
9713872983
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